उत्तर रेलवे की घोर लापरवाही से सर्द हवा और शीतलहरी के बीच एक महिला को यहां प्लेटफार्म पर ही बच्चा जनने को विवश होना पड़ा। बाद में किसी तरह एंबुलेंस से नवजात शिशु को महिला जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 15 घंटे बाद बुधवार को उसकी मौत हो गई।
महिला अपने परिवारीजनों के साथ कामाख्या एक्सप्रेस में जयपुर से दरभंगा जा रही थी। लखनऊ में प्रसव पीड़ा काफी तेज होने पर गार्ड से मदद की फरियाद की गई, लेकिन उसने अनसुना कर दिया।
हालत इतनी खराब हो गई कि फैजाबाद स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही महिला को लेकर परिवारीजन नीचे उतरे, तो प्लेटफार्म पर ही खुले में बच्चे का जन्म हुआ।
पीड़ित महिला साहनी खातून, पति सुभान, भाई इस्माइल, भाभी व बच्चों के साथ जयपुर से मुजफ्फरपुर का जनरल टिकट लेकर डाउन कामाख्या एक्सप्रेस में सवार हुई थी। सभी लोग दरभंगा जिले के सिंगवाड़ा थाना क्षेत्र के गांव तरौनी मयूरा जा रहे थे।
...इस तरह बढता गया तेज दर्द
साहनी को मंगलवार दोपहर में लखनऊ से कुछ पहले प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पीड़ित महिला के भाई इस्माइल का कहना है कि लखनऊ में इसकी शिकायत ट्रेन के गार्ड व दूसरे लोगों से की गई लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। गार्ड ने फैजाबाद में ट्रेन रुकने पर उतर जाने की सलाह दी।
गाड़ी लखनऊ से छूटी तो बहन का दर्द और बढ़ता गया। छटपटाती बहन को बाराबंकी में उतार दिया जाता तो भी तत्काल इलाज मिल जाता। ट्रेन फैजाबाद पहुंची तो हालत गंभीर हो गई थी।
किसी तरह स्टेशन की सफाई कर्मी शांति व उसकी दूसरी महिला साथियों से मदद की गुहार लगाई गई, तो वे दौड़कर आईं। भागकर स्टेशन मास्टर को सूचना दी गई।
स्टेशन मास्टर ने तुरंत रेलवे डॉक्टर को बुलवाया लेकिन तब तक प्लेटफार्म पर ही बच्चा पैदा हो चुका था।
बच्चा पैदा होने के बाद रोया नहीं और...
सफाई कर्मी शांति का कहना है कि बच्चा पैदा होने के बाद रोया नहीं। बहुत ठंड थी, बड़े साहब और डॉक्टर साहब ने दोनों को महिला अस्पताल भिजवाने के लिए एंबुलेंस मंगवाया। पौने घंटे बाद एंबुलेंस आई तो देर शाम प्रसूता को उसके पति लेकर जिला महिला अस्पताल गए।
पीड़ित महिला के भाई इस्माइल ने बताया कि अस्पताल में मां-बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। मशीन (वार्मर) में बच्चे को रखा गया। बुधवार सुबह करीब 10 बजे अस्पताल में बच्चे की मौत हो गई। बच्चे को दफनाने के बाद सभी गंतव्य को रवाना हो गए।
मामले पर स्टेशन अधीक्षक दिग्विजय कुमार का कहना है कि महिला तक उनके और डॉक्टर के पहुंचने से पहले बच्चा पैदा हो चुका था। जच्चा-बच्चा को एंबुलेंस से भेजकर देर शाम महिला अस्पताल में भर्ती करवाया था। मुजफ्फरपुर के लिए सीधी ट्रेन न होने से उसी टिकट पर ब्रेकजर्नी दिखाकर बुधवार को सभी को फरक्का एक्सप्रेस से मुगलसराय भेजा गया है।