अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में नाटक का मंचन करने कलाकार।
लखनऊ। एक झूठ छिपाने के लिए इंसान को कई झूठ बोलने पड़ते हैं। यह स्थिति कई बार हास्यास्पद रूप ले लेती है। कुछ ऐसी परिस्थितियां देखने को मिलीं नाटक ‘तिल का ताड़’ में। कुंवारों की आवासीय समस्या पर आधारित इस नाटक का मंचन अनादि संस्था की ओर से सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में किया गया। नाटक के लेखक शंकर शेष और निर्देशन किया मुन्नी देवी ने।
नाटक का नायक प्राणनाथ अपने मकान मालिक धन्नामल से झूठ बोलकर उनके यहां किराये पर रहता है कि उसकी शादी एक साल पहले हो चुकी है। उसने बताया कि मां की तबियत खराब है, इसलिए पत्नी उनके पास है और कुछ दिन बाद आ जाएगी। एक साल बीत जाता है, पर उसकी पत्नी नहीं आती तो मकान मालिक कहता है कि अगर कल तक तुम्हारी पत्नी नहीं आई तो मकान खाली करना पड़ेगा। प्राणनाथ अपने दोस्त पवित्र पावन शर्मा से मदद मांगने जाता है। इसी बीच कुछ गुंडे एक महिला मंजू को परेशान करते है तो प्राणनाथ उसे अपने घर ले आता है। वह मंजू से कहता है कि यदि आप यहां रहना चाहती है तो मेरी पत्नी बनकर रहें। मंजू तैयार हो जाती है। प्राणनाथ का एक ब्रह्मचारी दोस्त पूरा माजरा जान जाता है और पर्दाफाश की धमकी देता है। इस पर प्राणनाथ अपने ऑफिस में काम करने वाली मिस बाटलीवाला को ब्रह्मचारी के पीछे लगा देता है। इसी बीच प्राणनाथ जिस लड़की से प्यार करता है उसके पिता आ जाते है। हास्यास्पद स्थितियों के बीच मंजू अपना असली परिचय देती है। नाटक में संदीप देव, मुकुल चौहान, कोमल प्रजापति, गुरुदत्त पांडेय, अनिल कुमार, योगेंद्र यादव, उज्जवल सिंह, अंशिका सक्सेना और निरुपमा राहुल ने अभिनय किया।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में नाटक का मंचन करने कलाकार।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में नाटक का मंचन करने कलाकार।
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