फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एलडीए की 'ढिलाई' से आवंटियों की होगी जेब ढीली

Mon, 05 Aug 2013 07:17 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
एलडीए की लगभग पूरी हो चुकी ग्रुप हाउसिंग आवासीय योजनाओं के साढ़े छह हजार से अधिक आवंटियों पर प्राधिकरण की लापरवाही से बढ़े डीएम सर्किल रेट का बोझ पड़ा है।
विज्ञापन


31 जुलाई तक तमाम योजनाओं में रजिस्ट्री शुरू करवा देने का प्राधिकरण का दावा खोखला ही साबित हुआ। अब पांच अगस्त से विभिन्न योजनाओं के डीएम सर्किल रेट में लगभग 30 फीसदी तक का इजाफा हो जाएगा।

इसके चलते आवंटियों पर करीब 40 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा है। औसतन एलडीए के प्रत्येक आवंटी को लगभग 65 हजार रुपये अतिरिक्त रजिस्ट्री की दरों में बढ़ोतरी के नाम पर देना होगा।
विज्ञापन


देरी की ये रहीं वजहें
कहीं किसान आंदोलन से सख्ती से न निपट पाने की कमजोरी और कहीं भूमि विवाद को सुलटा न पाने के ढीलेपन के चलते एलडीए की योजनाओं में देरी हुई।

अब आवंटियों को मजबूरी में बढ़े हुए सर्किल रेट पर रजिस्ट्री करानी होगी। 1116 करोड़ रुपये की प्राधिकरण की इन योजनाओं में रजिस्ट्री के लिए आवंटियों को पहले लगभग 140 करोड़ रुपये देने पड़ते जबकि अब यह रकम 180 करोड़ रुपये हो जाएगी।

कास्ट बढ़ने और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के नाम पर आवंटियों पर आठ से 11 फीसदी का बोझ पहले ही पड़ चुका है। प्राधिकरण की एक दर्जन ग्रुप हाउसिंग योजनाओं में 31 जुलाई तक हर हाल में रजिस्ट्री शुरू कर दी जानी चाहिए थी।

दो महीने पहले हुई थी बैठक
उपाध्यक्ष ने दो महीने पहले आयोजित समीक्षा बैठक में इंजीनियरों से लेकर संपत्ति अधिकारियों तक को सभी योजनाओं में 31 जुलाई तक रजिस्ट्री कराने की चेतावनी दी थी, मगर ऐसा नहीं हो सका।

सभी योजनाओं में फिनीशिंग का दावा तो किया जा रहा है मगर रजिस्ट्री के नजदीक कोई भी नहीं है। प्राधिकरण की प्रगतिशील सभी योजनाएं वर्ष 2009 से 2010 तक शुरू हुई थीं।

इन सभी को वर्ष 2013 तक पूरा हो जाना था। इन सब में अब तक काम जारी है। सबसे बड़ी योजना सुलभ में जमीन का विवाद रहा।

विस्तार में जमीन का विवाद तो कानपुर रोड और शारदा नगर योजना में किसान आंदोलन पीछे पड़ा रहा। कानपुर रोड सनराइज स्कीम में भी किसान आंदोलन का भूत पीछे पड़ा रहा।

कल्पतरु में कोर्ट केस का अड़ंगा। जबकि बाकी सभी योजनाओं इंजीनियरिंग के ढीलेपन के चलते योजनाओं में विलंब होता रहा। आखिरकार लोगों पर डीएम सर्किल रेट की मार पड़ ही गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें