इसे पेट की आग बुझाने के लिए उठाया गया कदम कहें या चंद पैसे कमाने की जेद्दोजेहद। गोसाईगंज क्षेत्र के अर्जुनगंज इलाके में मचलखेड़ा गांव के सात युवकों में से पांच को उनकी मजबूरी मौत के टीले तक ले गई।
मिट्टी धंसने से उसमें दबकर घायल हुए एक युवक इंद्रपाल (24) को गंभीर हालत में इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इंद्रपाल से जब अस्पताल में पूछा गया कि वहां क्या करने गए थे तो उसने गोलमोल जवाब दिया।
दोबारा पूछने पर उसने बताया कि ठेकेदार ने कहा कि 200 रुपये मिलेंगे तो गांव के छह युवकों के साथ दोपहर 12 बजे उसके लालच में घर से चले आए थे। वहीं, ठेकेदार का नाम पूछने पर उसने नाम मालूम न होने की बात कही।
जब उससे यह पूछा गया कि वहां क्या करने गए थे, तो उसका जवाब नहीं दिया। वहीं, उसके घायल होने की सूचना पाकर अस्पताल पहुंची पड़ोसी महिला के मुताबिक, आसपास गांव के लड़के अक्सर फायरिंग रेंज में फौजियों के फायरिंग करने के बाद निकलने वाला सिक्का यानी खोखा बीनने जाया करते हैं।
आज जब इंद्रपाल खाना खा रहा था तभी गांव के कुछ लड़के आए व फायरिंग रेंज से खोखा बीनकर ज्यादा कमाने का लालच देकर इसको अपने साथ लिए चले गए।
उसने बताया कि इंद्रपाल गांव के प्रधान के अधीन में नरेगा में मजदूरी व खाली होने पर आसपास के गांवों में मजदूरी कर अपना व बुजर्ग मां प्यारी का पेट पालता था। लेकिन पेट भरने की मजबूरी के कारण मन में आयी जरा सी लालच में उसको जान तक के लाले पड़ गए।
बेटे का हाल सुनकर मां हुई बेहोश
पड़ोसी महिला ने बताया कि बेटे के मिट्टी में दबकर घायल होने की खबर सुनकर मजदूर इंद्रपाल की बुजुर्ग मां पियारी गश खाकर बेहोश हो गई। बेटे के हाल सुनकर रो-रोकर वह बेदम हो गई। घरवाले व पड़ोसी उसको ढांढस बंधा रहे कि वह अस्पताल में भर्ती है व खतरे से बाहर है।
लेकिन अपने लाडले को देखे बगैर उसको चैन नहीं मिलेगा। उसने बताया कि बुजुर्ग पियारी के पांच लड़के रामचंद्र, इंद्रपाल, रामपाल, सूरजपाल व धर्मपाल और एक लड़की है।