भूजल संरक्षण के लिए जरूरी है कि प्रदूषित हो रही नदियों, तालाबों में उपलब्ध जल को शुद्ध बनाया जाए। जिससे वह उपयोग लायक हो सके। प्रदेश में जल स्रोतों में प्रदूषण रोका जाएगा तो इसका फायदा बड़ी आबादी को मिलेगा।
साथ ही नदियों को सालभर बहने में भी मदद मिलेगी। ऐसा होने पर खेती से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की जरूरत पूरी होगी। प्रदूषण व सूखती नदियों से नागरिकों की मजबूरी हो गई है कि वे भूजल की ओर रुख करें।
इससे उसका दोहन अनियंत्रित हो गया है। ये बातें जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहीं। मौका था सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में भूजल सप्ताह के समापन समारोह का।
इस अवसर पर प्रदेश के लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग मंत्री राजकिशोर सिंह ने कहा कि प्रदेश के 36 जिलों के 108 खंडों में भूजल स्तर अति दोहन और चिंताजनक स्थिति तक नीचे गिर चुका है।
जबकि दस वर्ष पहले ऐसे क्षेत्रों की संख्या 22 थी। इनमें बुंदेलखंड व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हालात बहुत खराब हैं। अब इन क्षेत्रों की रिचार्ज बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से 1,500 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
कार्यक्रम में विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद देव, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन, सलाहकार डॉ. मो. मोहसिन खान ने भी भूजल का महत्व बताया।
विभाग के निदेशक पीआर चौरसिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। इसके बाद जल संरक्षण का महत्व को दिखाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए। इसी मौके पर विभाग ने भूजल संसाधन एटलस व भूजल रिचार्ज पुस्तिका का भी विमोचन किया।