छोटे इमामबाड़े के नजदीक स्थित करीब 200 साल पुराने हुसैनाबाद गेट की छत का एक हिस्सा शनिवार की रात भरभराकर जमीन पर गिर गया। केले के एक ठेले पर यह मलबा गिरा, जिससे ठेला पलट गया।
सौभाग्य से किसी व्यक्ति के ऊपर न गिरने से कोई हताहत नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, इस पुरातात्विक गेट के संरक्षण को लेकर शासन और प्रशासन गंभीर नहीं हैं। ऐसे में स्थिति बिगड़ती जा रही है। दिन पर दिन यह गेट जर्जर हो रहा है।
हुसैनाबाद रोड पर नवाब आसिफुद्दौला के समय का यह गेट है। जिसके तीन हिस्से हैं। घंटाघर की ओर से आते समय बायें हाथ का जो हिस्सा है, उसकी छत का एक टुकड़ा रात करीब आठ बजे भरभरा कर नीचे आ गिरा।
कुछ मलबा कल्लू केले वाले के ठेले पर गिरा। जिससे उसका ठेला पलट गया। जोरदार धमाका हुआ, जिससे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। देखते ही देखते भीड़ जमा होने लगी।
इसके बाद लगभग तीन घंटे बीत गए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दिए जाने के बावजूद यहां मलबा भी नहीं उठवाया गया।
स्थानीय नागरिक ओएस नासिर का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से लेकर नगर विकास मंत्री आजम खान तक को इस गेट के जीर्णोद्भार की मांग को लेकर पत्र लिखा गया है।
मगर अब तक कोई भी सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि, यहां जबरदस्त कब्जा है। केवल मोहर्रम के मौके पर रंग रोगन होता है। बाकी पूरे साल कुछ भी नहीं किया जाता है।