फिलहाल अपट्रान की बिल्डिंग में चल रहे कार्यालयों का किराया अभी नगर निगम को नहीं मिल पाएगा।
दरअसल अपट्रान के 30 कर्मचारियों के वेतन को देखते हुए शासन ने नगर निगम से रिपोर्ट तलब की है और बजट की व्यवस्था होने तक किराया अपट्रान को ही लेने देने का निर्देश दिया है।
अपट्रान की गोमती नगर जमीन की लीज 19 जून 2013 को नगर निगम ने निरस्त कर दी है। इसके बाद अपट्रान की बिल्डिंग में किराए पर चल रहे कार्यालयों को नगर निगम की ओर से यह नोटिस जारी की गई थी कि अब अपट्रान की बजाए नगर निगम में किराया जमा करें।
इसके बाद अपट्रान के विभागीय प्रभारी वीके कक्कड़ की ओर से उप सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग को पत्र लिखा था। इसमें यह कहा गया था कि बिल्डिंग से जो किराया आ रहा है, उससे ही अपट्रान के 30 कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। इसका एक मात्र यही स्रोत है।
यदि किराया नहीं मिलेगा तो वेतन का संकट खड़ा हो जाएगा। इसको देखते हुए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा नगर विकास विभाग को पत्र लिखा गया था, जिसके बाद विशेष सचिव नगर विकास श्रीप्रकाश सिंह की ओर से नगर आयुक्त को पत्र लिखा गया है।
जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति का हवाला देते हुए नगर आयुक्त से रिपेार्ट तलब की है। जिसमें यह भी कहा गया है कि अपट्रान ने अनुपूरक बजट में किराए की व्यवस्था कराकर नगर निगम को अलग से भुगतान करने की बात कही है।
तब तक वित्तीय स्थिति को अपट्रान को ही किराया लेने दिया जाए। अपट्रान बिल्डिंग में आधा दर्जन कार्यालय हैं। इनसे अपट्रान को हर महीना करीब तीन लाख रुपये किराया मिलता है। इससे ही कर्मचारियों का वेतन दिया जा रहा है।