मुर्तजापुर में बीमारी को लेकर दहशत बरकरार है। रविवार को जिनके नमूने लिए गए थे, उनमें से चार में टायफाइड के लक्षण मिले हैं। दम तोड़ने वाले लोगों के परिवार वालों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम नियमित रूप से निगरानी रख रही है। परिवार में किसी के भी बीमार होने की स्थिति में तुरंत उनकी जांच कराई जा रही है। अस्थाई चिकित्सा शिविर मे विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीजों के पंजीकरण का सिलसिला जारी है।
सोमवार के दिन अस्थाई शिविर में सीमा (18),बेलापति (78), राम शंकर (45),सुमन (22), सुंदारा (70), रघुनंदन (50), संतोष कुमारी (36),सरिता (30) सहित कुल 96 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें सीमा व संतोष कुमारी को शिविर मे भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वहीं खरगी पुर गांव के उदय शंकर की लड़की सुचैना भारती का सिविल अस्पताल मे इलाज चल रहा है, जहां उसकी हालत में सुधार है। शिविर में एसीएमओ डॉ. आरबी सिंह, एसीएमओ डॉ. संजय कुमार व पीएचसी प्रभारी नगराम डॉ. राजेश सिंह मौजूद थे।
बड़ा सवाल : पांच मौतों का जिम्मेदार कौन?
रहस्यमयी बीमारी के नाम पर पांच लोगों की नगराम के मुर्तजापुर में मौत हो गई। स्वास्थ्य महकमा सिर्फ दवाओं की छिड़काव व वितरण ही कराता रहा। पांच की मौत हो जाने के बाद केजीएमयू की टीम का सहयोग मांगा। यदि पहले ही यह कदम उठा लिया होता तो संभव था कि बीमारी का पता पहले लगाया जा सकता और मरीजों को मौत से बचाया जा सकता था।
जेई से युवक की मौत से भी नहीं लिया सबक
बीते दिनों चिनहट मटियारी स्थित कंचनपुर निवासी आशुतोष की जेई की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इस साल छह लोग इसकी चपेट में आए व 116 में एईएस के लक्षण मिले। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा नहीं जागा। यदि उसी वक्त हालात की गंभीरता समझ गए होते तो पांच की जान बच जाती।