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खटारा मिले स्कूली वाहन, 100 संचालकों को नोटिस

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गोंडा। विद्यालयों में चलाए जा रहे खटारा स्कूली वाहनों के खिलाफ रविवार को आरटीओ विभाग के अफसरों ने अभियान चलाया। इस दौरान अफसरों ने स्कूलों में छापा मारा और वाहनों की जांच-पड़ताल की। इस छापेमारी में सौ से अधिक स्कूली वाहनों की हालत खराब मिली है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अफसरों ने संबंधित 100 स्कूलों के संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही एक माह में वाहनों की खामियों को ठीक कराने का निर्देश दिया है। स्कूल संचालकों की लापरवाही का आलम यह है कि खटारा वाहनों में बच्चों को ठूंस कर लाया जा रहा है। स्कूली वाहनों के खस्ताहाल होने से मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
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जिले के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल लाने व ले जाने के लिए स्कूल प्रबंधन की तरफ से वाहन सुविधा दी जाती है। इस सुविधा के नाम पर बच्चों के अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जाती है। कहने को तो इन वाहनों में बच्चे को पूरी सुरक्षा प्रदान करने का दावा किया जाता है, मगर जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। स्कूलों में चल रहे अधिकतर वाहनों की फिटनेस खराब है। वाहनों के शीशे नदारद हैं तो सीट भी फटकर अलग हो चुकी है। इसके बावजूद इन वाहनों में भूसे की तरह से बच्चे ठूंसे जाते हैं। 38 सीटर वाली बस में 70 से अधिक बच्चों को बिठाकर स्कूल लाया जाता है। अगर किसी अभिभावक ने इसकी शिकायत भी की तो उसे झूठा दिलासा देकर समझा दिया जाता है। न तो इन वाहनों की फिटनेस की जांच कराई जाती है और न हीं टैक्स चुकाया जाता। इन सबके अलावा बच्चों की सुरक्षा को लेकर जो सबसे अहम बिंदु है, वह भी स्कूल संचालक नजरअंदाज कर रहे हैं। अधिकतर वाहनों की स्टेयरिंग ऐसे वाहन चालकों के हाथ में है, जो सड़क सुरक्षा की एबीसीडी भी नहीं जानते। रविवार को आरटीओ महकमे ने इन स्कूली वाहनों की जांच के लिए शहर के स्कूलों में छापेमारी की और उनके वाहनों की पड़ताल की तो पूरी हकीकत सामने आ गई। आरटीओ डीके पांडेय व एआरटीओ प्रशासन डॉ. सर्वेश गौतम की पड़ताल में सौ से अधिक वाहनों की फिटनेस खराब मिली है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए वाहनों का संचालन कर रहे सौ स्कूलों के संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। साथ ही स्कूल प्रबंधन को एक माह के भीतर वाहनों की खामियों को दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है।

वाहन चालकों की सेहत भी मिली खराब
ऐसा नहीं है कि सिर्फ स्कूली वाहनों की सेहत ही खराब है। इन वाहनों को चलाने वाले चालकों की सेहत भी अनफिट मिली है। बगैर मानक पूरा किए ही वाहन चालक सैकड़ों मासूम जिंदगियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन चालकों से कब कोई बड़ा हादसा हो जाए, कहा नहीं जा सकता। रविवार को आरटीओ विभाग के अफसरों से जब इन चालकों का सामना हुआ तो अधिकतर वाहन चालक अफसरों के टेस्ट में फेल हो गए। वाहन चालकों ने अफसरों से अपना दर्द भी साझा किया। चालकों का कहना है कि इतने कम वेतन में प्रशिक्षित चालक मिलना बहुत मुश्किल है। उन्हें तो स्कूल की तरफ से वर्दी भी नहीं दी जाती है।
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जीपीएस, सीसीटीवी, फर्स्ट एड बॉक्स, सब नदारद
बच्चों को लाने व ले जाने के लिए चलाए जा रहे स्कूली वाहनों में बच्चे की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी व जीपीएस सिस्टम व फ र्स्ट एड बॉक्स लगाए जाने का निर्देश है। मगर जिले में यह आदेश ठेंगे पर है। रविवार को स्कूली वाहनों की जांच की गई तो इसकी सच्चाई सामने आई। एक भी वाहन में यह सुविधा नहीं मिली। एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि सभी स्कूल संचालकों को अपने यहां संचालित वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, सीसीटीवी व जीपीएस सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया है।


स्कूली वाहनों का बनेगा डाटा बेस
रविवार को स्कूली वाहनों में मिलीं खामियों को देखते हुए आरटीओ महकमे ने इन वाहनों का डाटा बेस बनाए जाने का निर्णय लिया है। इसकी जानकारी देते हुए एआरटीओ प्रशासन डॉ. सर्वेश गौतम ने बताया कि स्कूल में चल रहे सभी छोटे बड़े वाहनों का डाटा बेस तैयार कराया जाएगा। इसमें चालक की डिटेल व नोडल टीचर समेत स्कूल के प्रबंधक/प्रधानाचार्य का पूरा ब्योरा रखा जाएगा। इसके लिए 15 अप्रैल को नोडल टीचर्स की ट्रेनिंग भी आयोजित की जाएगी।


रविवार को स्कूली वाहनों की जांच में सौ से अधिक वाहनों की फिटनेस खराब मिली है। यह बेहद गंभीर है। सभी वाहनों के स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और खामियों को दुरुस्त करने के लिए एक माह का समय दिया गया है। अगले एक सप्ताह तक यह जांच की कार्रवाई जारी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले बख्शे नही जाएंगे।
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- डीके पांडेय, आरटीओ
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