सीतापुर। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को फिजियोथैरेपी का लाभ नहीं मिल रहा है। कारण यह है एक सप्ताह से फिजियोथैरेपी करने वाली मशीन खराब पड़ी है। इससे रोजाना विभिन्न बीमारियों से ग्रसित 25-30 रोगी लौट रहे हैं।
वहीं अस्पताल प्रशासन इतना लापरवाह है कि वह मशीन बनवाने के लिए स्टीमेट बनने का इंतजार कर रहा है। इस लापरवाही के कारण सर्दी में जोड़ों के दर्द से परेशान मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
जिला अस्पताल में फिजियोथैरेपी की व्यवस्था उपलब्ध है। इसके लिए डायथरमी व टेंस मशीन लगी हुई है। इसके जरिए रोगियों की फिजियोथैरेपी की जाती है। एक सप्ताह पहले अचानक मशीन में तकनीकी खराबी आ गई।
इससे मशीन ने काम करना बंद कर दिया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अस्पताल में रोजाना 25-30 रोगी ऐसे आते हैं जिनको फिजियोथैरेपी की जरुरत होती है। इससे उनको काफी हद तक फायदा होता है। लेकिन मशीन खराब पड़ी है।
इसके कारण आने वाले रोगी बैरंग लौट जाते हैं। अस्पताल में पिछले दो दिन से फिजियोथैरेपी कराने आ रहीं पुष्पा का कहना है कि मशीन खराब पड़ी है। इससे मजबूरन लौटना पड़ रहा है। एक अन्य रोगी मीरा का कहना था कि फिजियोथैरेपी से काफी फायदा मिला है।
सर्दी में बहुत दिक्कत हो रही थी। लेकिन अस्पताल इतना लापरवाह है कि उसे मरीजों की चिंता ही नहीं है। इस बाबत फिजियोथैरेपी प्रभारी शांतनु अवस्थी का कहना है कि इसकी जानकारी सीएमएस को दे दी गई है।
किनके लिए फायदेमंद है फिजियोथैरेपी
चिकित्सकों का कहना है कि फिजियोथैरेपी उन रोगियों के लिए फायदेमंद है। जिन्हें जोड़ों का दर्द, लकवा, कमर दर्द, नसों का खिंचाव होता है। इसके अलावा हड्डी का ऑपरेशन करने के बाद जिनके हाथ व पैर व अंगुली टेढ़ी हो जाती है।
इनको फिजियोथैरेपी के माध्यम से ठीक कर दिया जाता है। वहीं सर्दी के मौसम में बुजुर्गों को गठिया जोड़ सहित अन्य कई बीमारियां आ जाती है। इन मरीजों को फिजियोथैरेपी से काफी आराम मिलता है। लेकिन अब यह सब बंद हो चुका है।
लापरवाह बोल
मशीन है, क्या खराब नहीं हो सकती है। स्टीमेट देखा जा रहा है अगर 20 हजार के अंदर आएगा तो बनवा दिया जाएगा इसके ऊपर होगा तो अनुमति लेनी होगी। लेकिन यह कब बनेगी यह वह नहीं बता सकें।
-डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस