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मुस्लिम पक्षकारों को कोई खरीद नहीं सकता: हाजी महबूब

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अयोध्या। श्रीश्री रविशंकर शाम को बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब से उनके आवास पर जाकर मिले। श्रीश्री के जाने के बाद हाजी महबूब ने कहा कि मुस्लिम पक्षकारों को कोई खरीद नहीं सकता। इकबाल अंसारी भले ही कम पढ़ा-लिखा हो लेकिन मुद्दे की बात करता है। जो 1992 के हालात थे वह न दोहराए जाएं, प्यार-मोहब्बत से मसला हल हो। कहा कि श्रीश्री कुछ बात हुई है, जब वे बताएंगे तब मैं सामने रखूंगा। मेरा शुरू से ये कहना है कि मस्जिद की जमीन छोड़ दीजिए, उसके बाद शेष जमीन जो मुसलमानों की है उस पर मंदिर बना लीजिए हमें ऐतराज नहीं है। हमें केवल मस्जिद के लिए 120-90 फुट का इलाका छोड़ दीजिए। कहा, हमेशा चाहते हैं बातचीत से मसला हल हो जाए। कुछ बातें मेरी उनकी हुई हैं, यदि वे उस पर कायम हैं तो हो सकता है। कहा कि चंद पार्टियां ऐसी हैं जो नहीं चाहतीं कि मंदिर बने उनकी दुकान बंद हो जाएगी। विहिप तो हमेशा ये चाहती रही है। विहिप पार्टी नहीं, हिन्दूमहासभा भी नहीं है फिर भी दावेदारी ठोकती है। निर्मोही अखाड़ा, महंत धर्मदास पार्टी हैं, धर्मदास के गुरू ने मूर्ति रखी थी। इसके बाद मुकदमा हुआ। आडवाणी साहब ने आवाज उठाकर मस्जिद को शहीद करा दिया। इसके बाद मैंने रिट दायर की और मुल्जिम बना दिया। इन सब चीजों को किनारे रखकर मुहब्बत से सुलह हो सकती है।
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हिंदू-मुस्लिम एक हैं, गड़बड़ हैं नेता: इकबाल
अयोध्या। श्रीश्री रविशंकर बाबरी मस्जिद के मुद्दई स्व. हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी से मिलने टेढ़ीबाजार स्थित उनके आवास पहुंचे। उन्होंने घर के बाहर स्वागत में खड़े इकबाल को गले लगाया फिर अंदर पहुंचकर हालचाल पूछा। श्रीश्री ने कहा कि सौदा, संघर्ष नहीं संवाद चाहते हैं। दोनों समुदाय एकत्र हो जाएं तो मामले के समाधान का रास्ता निकलेगा। इकबाल ने जवाब दिया कि दोनों समुदाय एकत्र हैं, राजनीति बाधा है, हिन्दू-मुस्लिम के विचार गड़बड़ नहीं हैं, गड़बड़ हैं नेता। श्रीश्री के जाने के बाद इकबाल ने मीडिया से कहा कि श्रीश्री केवल मिलने आए थे। हमारे यहां आए हैं उनका स्वागत है। मंदिर-मस्जिद मसले पर कोई बात नहीं हुई। कोई फार्मूला नहीं बताया हमको, हालचाल पूछे।
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