बहराइच/राजीचौराहा। घाघरा नदी की कटान से पीड़ित परिवारों को तहसील प्रशासन जमीन खरीदकर बसाएगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। जमीन खरीदने के लिए क्षेत्रीय लेखपालों को जमीन चिन्हित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन से 10 करोड़ रुपये जारी कर दिए है।
बरसात के पूर्व सभी को जमीन मुहैया कराने की तैयारी है। इस कदम से तटबंध पर गुजर बसर कर रहे 1200 परिवारों को उनका सपनों का आशियाना मिल सकेगा। जिले में प्रति वर्ष घाघरा नदी बाढ़ और कटान करते हुए कहर बरपाती है। इसके कारण महसी, कैसरगंज और नानपारा आंशिक के 196 राजस्व गांव घाघरा नदी के कहर की चपेट में आते हैं।
1980 के आसपास घाघरा नदी कटान करते हुए महसी तहसील क्षेत्र में आबादी के निकट पहुंच गई। इसके बाद शुरू हुई विनाश लीला का दौर अब तक जारी है। वर्ष 1980 से अब तक घाघरा की कटान की जद में आकर 86 गांवों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। शुरुआती दौर में जो गांव नदी की कटान में खत्म हुए उन गांवों के लोगों ने इधर-उधर शरण ली।
लेकिन 1992 के आसपास कटान पीड़ितों ने नदी में घर समाहित होने के बाद बेलहा बेहरौली तटबंध पर झोपड़ी बनाकर गुजर बसर शुरू कर दिया। इस समय लगभग 1200 परिवार भगवानपुर से बौंडी के मध्य तीन किलोमीटर की दूरी में तटबंध पर रह रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने कटान और बाढ़ पीड़ितों को पुनर्वासित करने के लिए जिला प्रशासन को जमीन खरीदने का आदेश दिया है। इसे तहत लगभग 10 करोड़ का बजट भी शासन ने अनुमोदित कर दिया। महसी के उप जिलाधिकारी डॉ. संतोष उपाध्याय ने बताया कि तटबंध और सड़क किनारे रह रहे कटान पीड़ितों का सर्वे शुरू करवाया गया है।
उन्हें बसाने के लिए तटबंध के इस पार जमीन चिन्हित करने की भी कवायद शुरू की गई है। क्षेत्रीय लेखपालों से ग्राम समाज की जमीन का ब्यौरा मांगा गया है। ग्राम समाज की जमीनों की रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजेंगे। जरूरत हुई तो जमीनों को खरीदकर कटान पीड़ितों को बसाया जाएगा
डीएम के हस्तक्षेप पर बची थी झोपड़ियां
तटबंध पर रह रहे पीड़ित खानाबदोशों की जिंदगी जी रहे हैं। छह माह पूर्व सभी को सिंचाई विभाग की ओर से नोटिस जारी कर तटबंध से झोपड़ियां हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन का सहारा लिया था। तत्कालीन जिलाधिकारी अजयदीप सिंह के हस्तक्षेप पर सभी की झोपड़ी बची थी।
डेढ़ दशक से आवास दिलाने को कर रहे संघर्ष
कटान पीड़ितों के लिए बहराइच विकास मंच की ओर से डेढ़ दशक से संघर्ष किया जा रहा है। मंच के अध्यक्ष राजेश त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में सरकार को पत्र लिखने के साथ ही जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी। इसके बाद अब सरकार ने बजट जारी किया गया है।