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दौर बदला तो टीवी-सिनेमा में भी आया बदलाव : उमेश

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रायबरेली। नायक, बागी जैसी सात फिल्मों में भूमिका निभाने वाले तथा 52 सीरियल में काम करने वाले अभिनेता उमेश वाजपेयी का मानना है कि बदलते दौर के साथ ही टीवी और सिनेमा में भी बदलाव आया है। फिल्मी जगत में करीब 17 साल का सफर तय करने वाले उमेश ने कई उतार-चढ़ाव और बदलाव भी देखे हैं। उमेश कहते हैं कि अब सब कुछ मार्केट के हिसाब से तय होता है। कोई फिल्म हो या फिर टीवी सीरियल, उसके लिए पहले यह देखा जाता है कि कौन से किरदार ज्यादा पापुलरिटी हासिल करेंगे और उसकी मार्केटिंग कैसे हो सकेगी।
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उमेश की दो फिल्में अभी हाल में ही रिलीज हुई हैं। उमेश ने बताया कि अक्तूबर में बंदूखराज और दिसंबर में गेम ओवर रिलीज हुई। बंदूखबाज फिल्म मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर बनी है, जबकि गेम ओवर एक मर्डर मिस्ट्री है। उनका एक सीरियल शंकर जयकिशन अभी बंद हुआ है, जिसमें उन्होंने गुप्ता जी का किरदार निभाया है। उमेश ने बताया कि उन्होंने कॉमेडी रोल ज्यादा किए हैं। यारों का टशन सीरियल में चतुर्वेदी चिंतामणि का किरदार काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने इस किरदार को लेकर कई किस्से भी सुनाए।
शहर के क्रांतिपुरी निवासी उमेश वाजपेयी को बचपन से ही अभिनय का शौक था। सेंट्रल स्कूल में वह अक्सर स्टेज शो करते थे। इलाहाबाद में उन्होंने पहला थियेटर शो कबूतर किया था। उमेश कहते हैं कि भले ही उन्होंने माया नगरी में पहचान बना ली हो, लेकिन त्योहार मनाने के लिए वह अपने घर जरूर आते हैं। परिवार और दोस्तों के बीच रहते हैं। इस बार आगरा में होने वाली शूटिंग के सिलसिले में आना हुआ तो परिवारीजनों और दोस्तों से मिलने चला आया।
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नई फिल्म की शूटिंग के लिए जाएंगे आगरा
उमेश अपनी नई फिल्म आई एम द जीरो की शूटिंग के लिए आगरा जाएंगे। इस फिल्म की शूटिंग 14 दिसंबर से शुरू होगी। करीब दो घंटे की इस फिल्म में उमेश को वाइस प्रिंसिपल का किरदार मिला है। शूटिंग लगभग 20 दिन चलेगी। उमेश ने बताया कि यह फिल्म जातिवाद और ज्ञान पर केंद्रित होगी। फिल्म के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि किसी भी विद्या को कोई भी समुदाय ग्रहण कर सकता है। यह फिल्म इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी, ताकि फिल्म का प्रदर्शन फेस्टिवल में किया जा सके।

छात्र संघ नेता होने के कारण फिल्म में मिला था पहला रोल
अभिनेता उमेश वाजपेयी को अभिनय के क्षेत्र में एंट्री छात्र नेता होने के कारण मिल गई थी। खुद उमेश बताते हैं कि 1992 में जब वह इलाहाबाद में छात्र संघ के नेता थे, उसी समय सूना खंडहर नामक फिल्म की शूटिंग होनी थी। सभी छात्र इस बात पर अड़ गए कि जब तक उनके नेता उमेश को रोल नहीं मिलेगा, शूटिंग नहीं होने देंगे। इस पर फिल्म में उन्हें इंस्पेक्टर का रोल दिया गया।
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