लखनऊ। वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजधानी में प्रस्तावित आधुनिक कुकरैल नाइट सफारी का प्रस्तावित मॉडल जारी कर दिया गया है। करीब 855 एकड़ में बनने वाली इस सफारी का मुख्य द्वार आदिम युग की थीम पर तैयार होगा। अंदर दर्शकों के लिए लग्जरी इंतजाम होंगे। टिकट 500 रुपये और एक साथ 8,000 दर्शकों के सफारी में जाने की व्यवस्था होगी।
मुख्य द्वार गुफानुमा होगा। यहां हाथी की प्रतिमा और ऊपर शेर, हिरण समेत अन्य वन्यजीवों की आकृतियां नजर आएंगी। द्वार को पत्थर और लकड़ी के लुक से सजाया जाएगा। भीतर प्रवेश करते ही झरनों के बीच बैठने की जगह मिलेगी, मानो किसी पहाड़ी दर्रे में हों और चारों ओर झरने बह रहे हों।
मुख्य द्वार से लगभग एक किमी तक चार लेन की सड़क और अंदर 200 वाहनों की पार्किंग बनाई जाएगी। पूरा परिसर इस तरह डिजाइन होगा कि दिन और रात का फर्क महसूस न हो। दर्शक खुद को पहाड़ और घने जंगल के बीच होने की अनुभूति करेंगे।
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दो वर्ष में पहले चरण का काम पूरा करने का लक्ष्य
कुकरैल सफारी पार्क के निदेशक राम कुमार के अनुसार, परियोजना को प्रदेश सरकार की मंजूरी मिल गई है और पहले चरण के लिए 631 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत है। पहले चरण का काम दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि, सफारी का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, वहां से अनुमति मिलते ही निर्माण शुरू होगा। टिकट 500 से 1000 रुपये तक रखने की योजना है। सामान्य दिनों में 4000 और विशेष अवसरों पर 8000 दर्शक प्रवेश कर सकेंगे।
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नाइट सफारी सरकार ही चलाए
आईएफएस अधिकारी सीपी गोयल का कहना है कि चिड़ियाघर और वन्यजीव पार्कों में आने वाले अधिकतर दर्शक मध्यमवर्गीय होते हैं। इसलिए नाइट सफारी की कमान सरकार के पास ही रहनी चाहिए। निजी हाथों में देने पर टिकट कई गुना बढ़ सकता है और आम दर्शक इसकी पहुंच से बाहर हो जाएंगे।
कुकरैल सफारी पार्क का प्रस्तावित मॉडल।
कुकरैल सफारी पार्क का प्रस्तावित मॉडल।