रायबरेली। जिले में 2800 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए जिले में अफसरों की बेहद कमी है। नगर व 18 ब्लॉकों में सीडीपीओ के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन सात सीडीपीओ में दो का तबादला दूसरे जिले के लिए कर दिया गया। जिले को सीडीपीओ नहीं मिले हैं। सुपरवाइजरों के भी 103 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 43 सुपरवाइजर ही काम कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रों के संचालन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को अनुपूरक पोषाहार के साथ ही अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। केंद्रों पर हर माह कार्यक्रम भी आयोजित कराए जाते हैं। केंद्रों का सफल संचालन कराने के लिए हर ब्लॉक में एक-एक सीडीपीओ की जरूरत है। साथ ही कम से कम छह-छह सुपरवाइजर हर ब्लॉक में चाहिए। लंबे समय से जिले में सीडीपीओ और सुपरवाइजरों की कमी है। रिटायर्ड होने के बाद भी नए सीडीपीओ व सुपरवाइजर नहीं मिले हैं।
जिले में सात सीडीपीओ थे। इसमें दो का तबादला हो गया है। सीडीपीओ शिवानी गुप्ता और नागेंद्र भारती का दूसरे जिले के लिए तबादला होने के कारण अब मात्र पांच सीडीपीओ पर एक नगर व 19 ब्लॉकों की जिम्मेदारी है। 45 सुपरवाइजर में तीन सुपरवाइजरों का तबादला हो गया है। शासन से सिर्फ एक सुपरवाइजर मिला है, जबकि सुपरवाइजर के 103 पर हैं। ऐसे में केंद्रों का प्रभावी ढंग से संचालन और पर्यवेक्षण प्रभावित होना तय है। जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि एक-एक सीडीपीओ को तीन-तीन ब्लॉकों की जिम्मेदारी दी गई है। सुपरवाइजर भी आधे से भी कम हैं। उपलब्ध स्टाफ के माध्यम से काम चलाया जा रहा है।