फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनजीटी ने पूछा, दो सप्ताह में बताएं यश पेपर्स पर क्या की कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
एनजीटी ने पूछा, दो हफ्ते में बताएं यश पेपर्स पर क्या की कार्रवाई
विज्ञापन



लखनऊ। अयोध्या की यश पेपर्स इंडस्ट्री के खुले नाले में डिस्चार्ज गिराने के मामले में एनजीटी सख्त है। एनजीटी ने यूपीपीसीबी से पूछा है कि यश पेपर्स इंडस्ट्री पर क्या कार्रवाई की गई? इस कार्रवाई की जानकारी एनजीटी को दो सप्ताह में उपलब्ध कराएं।


यूपीपीसीबी के मुख्य पर्यावरण अधिकारी कुलदीप मिश्र ने बताया कि यश पेपर्स इंडस्ट्री के डिस्चार्ज को नाले में गिराने की शिकायत एनजीटी की अनुश्रवण समिति से की गई थी।
विज्ञापन



अनुश्रवण समिति ने कंपनी के ऊपर 15 लाख रुपये पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए हर्जाना भी लगाने की सिफारिश की थी। वहीं कंपनी को मानकों के मुताबिक प्लांट लगाने और नई पाइप लाइन के जरिए इस पानी को सरयू नदी तक ले जाने के लिए भी कहा गया था।


इसके बाद सरस्वती बनाम यश पेपर्स लिमिटेड वाद में एनजीटी ने यूपीपीसीबी से कार्रवाई करने के लिए कहा था। एनजीटी को पूरे मामले में रिपोर्ट भेजी जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई अब 17 जुलाई को होगी।


मालूम हो कि पूर्वी उत्तर प्रदेश नदी व जल प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डीपी सिंह ने पूर्व में अयोध्या आकर जांच करके सात बिंदुओं पर रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में उन्होंने कहा था कि यश पेपर इंडस्ट्री प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर खरी नहीं उतर रही है।


मिल से निकलने वाले प्रदूषित पानी से भूमिगत जल प्रदूषित हो रहा है, हैंडपंप से आने वाले पानी में इसका असर है। प्रभावित गांवों से लेकर सरयू नदी तक इसका दुष्प्रभाव है।


इसके लिए 15 लाख रुपये का जुर्माना अदा करने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के मानकों को पूरा करने की हिदायत दी गई थी। इसके लिए एसटीपी प्लांट लगाकर शोधित जल सरयू तक पाइप लाइन के जरिए डिस्चार्ज करने को कहा था।


यश पेपर मिल व आसपास के ग्रामीणों के बीच प्रदूषण को लेकर खूब संघर्ष हुए हैं। इसकी शुरुआत पिछले साल गर्मी में तब हुई जब गन्ने की फसलें खराब होने लगीं। इसके साथ ही की लोगों को गंदे पानी से प्रभावित होना पड़ा। पूर्व विधायक अभय सिंह की खेती भी प्रभावित हुई तोे लामबंद होकर लोगों ने नाले को ही बांध दिया।
विज्ञापन



मिल की शिकायत पर जिले से अफसरों ने फोर्स के साथ जाकर नाला खुलवाया। इसके बाद ये संघर्ष रुक-रुककर चलता रहा। मामला हाईकोर्ट से लेकर एनजीटी तक पहुंचा तो पूर्वी उ.प्र. नदी व जल प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष व हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डीपी सिंह ने आकर जांच-पड़ताल की। अब मामले में एनजीटी के आदेश के बाद खलबली मची हुई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें