पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर विचार के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति की पहली ही बैठक में कर्मचारी और शिक्षक नेता उखड़ गए। उन्होंने शासन के अधिकारियों पर असली मुद्दे पर बात न करने का आरोप लगाया। साथ ही समिति की अगली बैठकों में भाग न लेने का निर्णय किया।
प्रदेश में पुरानी पेंशन के लिए कर्मचारी, शिक्षक और इंजीनियर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इस पर विचार के लिए सरकार के स्तर पर अपर मुख्य सचिव, कार्मिक मुकुल सिंहल की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। सोमवार को समिति की लोकभवन में पहली बैठक हुई। इसमें शासन की ओर से वित्त, न्याय, नियोजन विभाग के अधिकारी और निदेशक, पेंशन भी मौजूद रहे। वहीं, पुरानी पेंशन बहाली मंच की ओर से संयोजक हरिकिशोर तिवारी और अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा शामिल हुए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, वित्त संजीव मित्तल और अपर मुख्य सचिव दीपक त्रिवेदी के बजाय इन विभागों के विशेष सचिव के आने पर मंच के नेताओं ने आपत्ति जताई। कहा, इससे पता चलता है कि अधिकारी बैठक को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं।
यहां बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरानी पेंशन बहाली मंच की मांग पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने के निर्देश दिए थे। इसमें शासन के अधिकारियों के अलावा कर्मचारी और शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल करके दो माह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया था। सोमवार को हुई पहली बैठक में भारत सरकार के पीएफआरडीए के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। बताते हैं कि पीएफआरडीए के अधिकारियों ने बैठक में सीधे हिस्सा लेने के बजाय शंकाओं के समाधान के लिए अपने प्रदेश स्तर के प्रभारी अधिकारी को भेजने की बात की। इस पर कर्मचारी नेताओं ने असंतोष जताया।
मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि भविष्य में पुरानी पेंशन बहाली से इतर किसी बिंदु पर वार्ता करने पर हम बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। इस बारे में मुख्य सचिव को भी बता दिया गया है। उन्होंने कहा, समिति की पहली बैठक ही पूरी तरह विफल रही। अधिकारी सिर्फ न्यू पेंशन स्कीम पर बात करते रहे, जबकि हमारा स्पष्ट मानना है कि यह व्यवस्था कार्मिकों व शिक्षकों के हित में नहीं है।