तपोस्थली स्थित आनंद बोधि पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध तपोस्थली शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। कंबोडिया से 30 व थाईलैंड से 40 सदस्यीय दल शुक्रवार को तपोस्थली पहुंचा। इस दौरान दल के सदस्यों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में आनंद बोधि पर प्रार्थना की।
सभा के दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि गौतम बुद्ध के मत में अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है, जिससे दुख का निदान होता है। अष्टांगिक मार्ग चूंकि ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्मांत, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। इसीलिए यह मध्यम मार्ग है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला, शांति देने वाला, निर्वाण देने वाला है। अत: यह कल्याणकारी है, और जो कल्याणकारी है वही श्रेयस्कर है। गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को अपने आचरण में लाना आवश्यक है। अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया। साथ ही तपोस्थली की विभिन्न स्मारकों का भ्रमण किया।