आए दिन स्मार्ट मीटर की गड़बड़ियों से परेशान 6615 उपभोक्ताओं ने स्थायी रूप से बिजली कटवा ली है। इससे पहले दिसंबर 2020 तक प्रदेश के 1440 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं द्वारा बिजली कटवा लेने का मामला सामने आया था। प्रदेश में बिजली कंपनियों द्वारा लगवाए गए स्मार्ट मीटरों में लगातार गड़बड़ियां सामने आने से उपभोक्ताओं का मोह भंग होता जा रहा है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ताओं में भरोसा पैदा करने के लिए केंद्र सरकार से उच्च गुणवत्ता के स्मार्ट मीटर लगवाने की मांग की है।
प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना लागू होने बाद से ही विवादों में हैं। मीटर तेज चलने, भार जंपिंग व अन्य तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें आम हैं। पिछले साल जन्माष्टमी पर एक साथ लाखों उपभोक्ताओं की बत्ती गुल होने के बाद तो स्मार्ट मीटर की पोल ही खुल गई। इसके बाद से बिजली उपभोक्ता स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालांकि इस समय स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक है लेकिन अब तक लग चुके करीब 12 लाख मीटरों के बारे में अभी तक कोई निर्णय न होने से उपभोक्ताओं में संशय की स्थिति बनी हुई है।
तमाम उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से निजात पाने के लिए कनेक्शन का स्थायी विच्छेदन ही करा ले रहे हैं। राजधानी लखनऊ में 1320, मथुरा में 782, वाराणसी में 542, मेरठ में1409, प्रयागराज में 136, गोरखपुर में 112, बरेली में 233 तथा केस्को में 1205 उपभोक्ताओं ने कनेक्शन कटवाया है।
केंद्र सरकार की ओर से अब स्मार्ट मीटर की जगह प्री-पेड मीटर लगाने की पहल की जा रही है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मंगलवार को केंद्रीय ऊर्जा सचिव आलोक कुमार से बात कर अनुरोध किया कि भविष्य में लगाए जाने वाले प्री-पेड मीटरों की गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया जाए। उच्च गुणवत्ता के मीटर ही लगावाए जाएं जिससे उपभोक्ताओं को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। वर्मा के अनुसार केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने इस संबंध में परिषद से प्रस्ताव भी मांगा है।
जल्द ही परिषद की ओर से उपभोक्ता हित में प्रस्ताव तैयार करके भेजा जाएगा। साथ ही उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री व ऊर्जामंत्री से मांग की है कि घटिया स्मार्ट लगवाने के जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।