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Lucknow News: बस टर्मिनल के लिए 64 पेड़ों पर चलेगी आरी

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रोजवेज वर्कशॉप में लगे पेड़। 
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लखनऊ। एक ओर प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर हरियाली घट रही है। इस बीच पर्यावरण संरक्षण की सिर्फ बातें ही हो रही हैं। विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं। अमौसी स्थित रोडवेज वर्कशॅाप में अत्याधुनिक बस टर्मिनल बनाने के लिए यहां लगे नीम, आम, जामुन, रबर, पाकड़ के वर्षों पुराने 64 पेड़ों की बलि दी जाएगी। इसके लिए वन विभाग से अनुमति भी दे दी है।
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बस टर्मिनल बनाने का टेंडर ओमेक्स को हुआ है। यहां लगे पेड़ों से काफी हरियाली रहती है। वर्कशॅाप के कर्मचारियों ने बताया कि काटे जाने वालों पेड़ों की नंबरिंग कर दी गई है। इन पेड़ों पर सैकड़ों पक्षी चहचहाते हैं। प्रचंड गर्मी में काम करने वाले कर्मचारियों को भी इन पेड़ों से राहत मिलती है।



पांच एकड़ में 160 करोड़ रुपये से बनेगा टर्मिनल

छह एकड़ के वर्कशॅाप में पांच एकड़ में पीपीपी मॉडल पर 160 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक छह मंजिला बस टर्मिनल बनाया जाएगा। बाकी जगह में वर्कशॅाप रहेगा। टर्मिनल बनाने के लिए पेड़ों को काटना अनिवार्य बताकर अफसर खुद को असहाय दिखा रहे हैं।
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बदले में लगाने होंगे 640 पौधे

रोडवेज के पत्र का डीएफओ सितांशु पांडेय ने क्षेत्रीय प्रबंधक अमरनाथ सहाय को जवाब दिया है। उन्होंने लिखा है कि 64 पेड़ काटने के बदले 640 पौधे लगाने होंगे। हालांकि, अहम सवाल यह है कि क्या वर्षों पुराने इनद पेड़ों की भरपाई दस गुना नए पौधों से हो पाएगी?



लापरवाही : विकल्पों पर नहीं हुई चर्चा

पर्यावरण विशेषज्ञ हाफिज किदवई इन पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि वन विभाग ने बगैर निरीक्षण किए इसकी अनुमति कैसे दे दी? इतना ही नहीं टर्मिनल बनाने से पहले पेड़ों को लेकर चर्चा होनी चाहिए थी। जिनकी शिफ्टिंग हो सकती है, उन्हें बचाया जाना चाहिए।



आधिकारिक वर्जन

बस टर्मिनल के निर्माण में 64 पेड़ बाधक बन रहे हैं। रोडवेज प्रशासन ने इन्हें काटने की अनुमति मांगी थी, जो दी गई है। इन पेड़ों के बदले 640 पौधे लगाने होंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण हो सकेगा।
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- सितांशु पांडेय, डीएफओ, अवध वन प्रभाग

रोजवेज वर्कशॉप में लगे पेड़। 

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