दिवाली पर्व के पहले दिन धनतेरस पर बाजारों में महालक्ष्मी बरसी। लखनऊ ने अनुमानित 590 करोड़ रुपये से धनतेरस मनाई। पिछले साल के सापेक्ष इस धनतेरस पर 20 फीसदी अधिक कारोबार हुआ।
इस कारोबार में पहले नंबर पर रियल एस्टेट और दूसरे नंबर पर सराफा कारोबार रहा। यानी रियल एस्टेट कारोबार 200 करोड़ तो सराफा कारोबार 100 करोड़ का हुआ।
जबकि ऑटोमोबाइल कारोबार 80 करोड़ का रहा। खरीददार 40-40 लाख रुपये कीमत के डायमंड के सेट खरीद कर ले गये। जबकि पांच हजार से अधिक बाइक एवं तीन तीन चौपहिया वाहन बिके।
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के संरक्षक कैलाश जैन एवं महामंत्री प्रदीप अग्रवाल के मुताबिक धनतेरस के दिन तो सोने एवं डायमंड के हल्के वजन के गहने बिके, लेकिन दो पहले जिन कीमती गहनों की बुकिंग हुई थी उनकी डिलीवरी मंगलवार रात 12 बजे के बाद तक होती रही।
एक ही दिन में 200 करोड़ रुपए का बाजार
जैन ने बताया कि धनतेरस पर अनुमानित 35 से 37 करोड़ रुपये के अनब्रांडेड सोने एवं चांदी के गहने बिके।
पिछले साल धनतेरस पर करीब 30 करोड़ रुपये के अनब्रांडेड सोने एवं चांदी के गहने बिके थे।
जबकि एसोसिएशन के दूसरे पदाधिकारियों ने बताया धनतेरस पर अनब्रांडेड गहनों का 40 करोड़ रुपये कारोबार हुआ।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बताया कि बड़े शोरूम से ब्रांडेड गहने के नाम पर पांच से 50 लाख रुपये के सेट बिके, जिससे कुल कारोबार 60 करोड़ रुपये का होने की उम्मीद है।
धनतेरस पर कम से कम 200 करोड़ रुपये का कारोबार अकेले एक दिन में हो गया।
बाजार में निजी कंपनियों के फ्लैटों, प्लाटों और मकानों का पंजीकरण खूब हुआ। रियल एस्टेट बाजारों के विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मार्केट बढ़िया है।
रियल एस्टेट विशेषज्ञ अंकित गर्ग के अनुसार इस वजह से लोगों ने बाजार में अनेक विकल्प चुने। ग्रुप हाउसिंग स्कीमों में रुपया लगाने में लोग सबसे अधिक इच्छुक नजर आ रहे हैं।
अगले साल 300 करोड़ रुपए की आस
माना जा रहा है कि, अभी अगले दो दिनों में ये कारोबार 300 करोड़ तक पहुंच जाएगा। कई निजी कंपनियों को इस त्यौहार का लाभ मिला है।
रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ के चलते ही निबंधन कार्यालय देर शाम तक काम काज निपटाने को खुले रहे।
मंगलवार को करीब सात सौ भवन व जमीनों की रजिस्ट्री हुई। स्टांप शुल्क के बतौर सरकारी खजाने में महज धनतेरस पर 6 करोड़ से अधिक राजस्व राशि जमा हुई।
एआईजी निबंधन ओपी सिंह ने बताया कि धनतेरस पर अकेले निबंधन कार्यालय में ही पांच सौ रजिस्ट्री हुई जबकि बीकेटी, मोहनलालगंज व मलिहाबाद तहसील कार्यालयों के सब रजिस्ट्रार काउंटरों को भी इसमें शामिल करने पर जिले में मंगलवार को भू संपत्तियों के सात सौ निबंधन हुए।
इसके माध्यम से 6 करोड़ से अधिक की स्टांप ड्यूटी सरकारी खजाने में जमा होने की संभावना है।