केस-1
गृहकर समाधान शिविर में पहुंचे मल्लाही टोला के पप्पू ने बताया कि उनका घर सिर्फ 200 वर्गफीट का है। आर्थिक हालत ठीक नहीं है। वे उसी घर में रहकर दर्जी का काम करते हैं। यहीं के रहने वाले हैं मगर कभी उनके यहां गृहकर का बिल नहीं गया। अब 20 साल बाद आया तो एक साथ 57,440 रुपये का है। इससे पप्पू व उनकी पत्नी के होश उड़े हुए हैं।
केस-2
गृहकर समाधान शिविर में पहुंचे निशातगंज के देवांश ने बताया कि पिछले साल तक उनके मकान का गृहकर महज 325 रुपये जमा होता है। अब फिर बिल आया है तो उसमें सालाना गृहकर बढ़ाकर 2,160 रुपये कर दिया गया है। यह तो करीब सात गुना बढ़ा दिया गया है जबकि घर में कोई नया निर्माण भी नहीं हुआ है। कई बार नगर निगम के दफ्तर जा चुका हूं, मगर टैक्स सही नहीं हुआ। अब गृहकर समाधान शिविर में आया हूं।
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर भवनस्वामियों को एक साथ 20-20 साल का बिल भेज रहे हैं। इससे भवनस्वामियों के होश उड़ रहे हैं। शुक्रवार को नगर निगम में आयोजित गृहकर समाधान शिविर में कुल 48 मामले आए, जिनमें कई ऐसे भी रहे। हालांकि, अब गृहकर समाधान शिविर हर शुक्रवार के बजाय महीने के पहले शुक्रवार को ही लगेगा। यह बदलाव जीआईएस सर्वे से जुड़ी शिकायतों के कम होने के चलते किया गया है।
शिविर में जिस तरह से मनमाने गृहकर बिल के मामले आ रहे हैं उससे लगता है कि रोज होने वाली नगर आयुक्त गृहकर वसूली समीक्षा को कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने कहा, शिविर मेंं जो मामले आ रहे हैं उनका निस्तारण कराया जा रहा है। महापौर और नगर आयुक्त का साफ आदेश है कि शिविर मेंं आने वाली शिकायत का शिविर में ही निस्तारण हो, उसे टाला न जाए। ऐसे में जो भी मामले आए उनका निस्तारण कराया गया।
आधा घंटे खाली रहीं सुनवाई करने वालों की कुर्सियां
गृहकर समाधान शिविर सुबह 10 से एक बजे तक आयोजित था, लेकिन करीब दोपहर 12 से 12:30 बजे तक शिविर में शिकायत सुनने वाले जिम्मेदारों के न होने से कुर्सियां खाली थीं। महापौर, अपर नगर आयुक्त डा. अरविंद राव के दफ्तर में थीं और नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ऑफिस में। हालांकि, उससे पहले महापौर, अपर नगर आयुक्त व मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने शिविर में बैठकर शिकायतें सुनीं।
इन जोनों में आईं शिकायतें
जोन एक-06
जोन दो-03
जोन तीन-03
जोन चार-08
जोन पांच-04
जोन छह-06
जोन सात-12
जोन आठ- 06