बहराइच/बिछिया। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के गेरुआ नदी टापू पर घड़ियालों के नए कुनबे ने आंखें खोली हैं। बुधवार तड़के अलग-अलग घोंसलों से 90 नन्हें मेहमान निकले।
सभी घड़ियालों को गेरुआ नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। गेरुआ नदी में टापू पर अलग-अलग स्थानों पर इस बार 38 घोंसले चिन्हित हैं। इन पर नजर रखने के लिए वन विभाग की टीम निरंतर गश्त कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार पांच दिनों में शेष सभी घोंसलों के अंडों से घड़ियाल निकल आएंगे। वनाधिकारी व जलीय जीव विशेषज्ञ निरंतर निगरानी भी कर रहे हैं। 38 घोंसलों से 1500-2000 नए मेहमानों के कतर्निया में जन्म लेने की उम्मीद है।
कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 285 वयस्क घड़ियाल हैं।
प्रति वर्ष मार्च के अंत में घड़ियाल नदी के टापू पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोंसला बना देते हैं। एक घोंसले में औसतन 45 से 50 अंडे होते हैं।
बालुओं में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती है। 15 जून का समय अंडों से बच्चों के निकलने का होता है। लेकिन इस बार तराई का मौसम अधिक गर्म है।
सूरज की तपिश से पारा 40 से 44 डिग्री के आसपास है। इससे गेरुआ नदी के टापुओं पर भी सामान्य से ज्यादा गर्मी है। इससे निर्धारित समय से आठ दिन पूर्व अंडों से बच्चे निकलने की शुरुआत हो गई है।
कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि बुधवार तड़के अलग-अलग स्थानों पर तीन घोंसले खुले हैं। इनसे 90 नन्हें घड़ियाल निकले हैं।
इन घड़ियालों को नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। टापू पर घोंसलों की निगरानी के लिए वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह, डब्ल्यूआईआई के शोधकर्ता गौरव कुमार व वनकर्मी गुलाम रसूल स्वयं निगरानी कर रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि वन दरोगा व नाविक की अगुवाई में भी एक टीम गठित की गई है। 24 घंटे मोटरबोट व नाव के सहारे टापू की निगरानी की जा रही है। डब्ल्यूआईआई के शोधकर्ता गौरव के मुताबिक आगामी पांच दिन में शेष 35 घोंसले भी खुल जाएंगे।
इस तरह खुलते हैं घोंसले
वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि जब अंडों में बच्चे परिपक्व हो जाते हैं तो उनसे विशेष किस्म की आवाज निकलने लगती है।
टापू के आसपास मौजूद मादा घड़ियाल आवाज को सुनकर घोंसले तक पहुंचती है और उनके ऊपर से बालू हटा देती है। इस पर अंडों से निकले बच्चे सुरक्षित नदी में पहुंच जाते हैं। कभी-कभी मादा घड़ियाल नहीं पहुंच पाती है, तब आवाज के आधार पर खुद घोंसले खोलने पड़ते है।
42 डिग्री होना चाहिए तापमान
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवानदास लखमानी ने बताया कि अंडों से बच्चों के निकलने के लिए नदी क्षेत्र का तापमान 42 डिग्री होना चाहिए।
इस बार तापमान 44 डिग्री के आसपास है। नदी का रेतीला क्षेत्र होने के कारण तापमान वैसे भी अधिक रहता है। अधिक तापमान से 15 जून के पूर्व ही ब्रीडिंग शुरू हो गई है।
नर घड़ियाल होंगे अधिक
वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि अधिक गर्मी पड़ने पर अंडों से निकलने वाले बच्चों में नर अधिक होते हैं। सामान्य मौसम होने पर नर और मादा की संख्या लगभग बराबर होती है।
उन्होंने बताया कि टापू पर निगरानी बढ़ा दी गई है। रेंजर ने बताया कि भवानीपुर घाट और आंबा घाट में दो किलोमीटर के दायरे में टापुओं पर बालू में अंडे सुरक्षित हैं।
शोधकर्ता गौरव ने बताया कि पहले वर्ष में मादा घड़ियाल 35-45 अंडे देती है। दूसरी बार वही मादा घड़ियाल के अंडों की संख्या 45 से 65 तक पहुंच जाती है।