बहराइच। फिलहाल जिले की कोई भी ग्राम पंचायत स्मार्ट कहलाने लायक नहीं है। सभी ग्राम पंचायतें जरूरी संसाधन भी नहीं जुटा सकी हैं, इन्हें स्मार्ट बनाने की बात अभी दूर की कौड़ी नजर आती है। ऐसे में स्मार्ट ग्राम पंचायतों का चयन करने संबंधी प्रदेश सरकार का फरमान हवा-हवाई ही लग रहा है। बहराइच जिले में ग्राम पंचायतें अति पिछड़ी हैं। बिना भवन के ही स्कूल, खलिहान आदि में पंचायतों की बैठक चलती है। जिले की ग्राम पंचायतें इसमें पीछे छूट सकती हैं।
बहराइच जनपद की आबादी लगभग 42 लाख के करीब है। जनपद में ग्रामीण आबादी करीब 35 लाख है। जिले के 14 विकास खंडों की 1054 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों में आधे से अधिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में होने के कारण मुख्यमंत्री पुरस्कार योजना से सीधे तौर पर बाहर हो गई हैं। यूपी कैबिनेट ने पेयजल, सफाई, स्कूल प्रबंधन, सौर ऊर्जा, शिक्षा, बाजार निर्माण आदि के मानकों के आधार पर गांवों को चयनित करने का निर्णय लिया है। जनपद की ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधि टैक्स लगाने से बचते हैं। महज तहबाजारी वसूली तक ही उनके कार्य सीमित रह जाते हैं। वहीं 40 से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां दूसरे रास्तों से घूमकर पहुंचना पड़ता है। स्कूलों में शौचालय, बाउंड्रीवॉल और बिजली तक की समुचित सुविधाएं मुहैया नहीं हैं। जिसके चलते ग्राम पंचायतों के पुरस्कार की दौड़ में शामिल होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम पंचायत अधिकारी डिजिटल इंडिया शुरू होने के बाद भी बस्तों में अभिलेख लेकर एक से दूसरी ग्राम पंचायत की दौड़ लगाते रहते हैं।
40 फीसदी ही पंचायत भवन
राज्य वित्त आयोग और चौदहवें वित्त आयोग के तहत जनपद की ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण कराया गया था। जिले में 40 फीसदी ग्राम पंचायतों में ही भवन बने हुए हैं। उसमें भी कई स्थानों पर अवैध कब्जे हैं। कहीं मलबा भरा हुआ है तो कहीं भूसे के ढेर लगे हुए हैं।
स्मार्ट बनाने के होंगे प्रयास
ग्राम पंचायतों को मुख्यमंत्री पुरस्कार योजना के तहत चयनित कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। जनप्रतिनिधियों को प्रेरित किया जाएगा। प्रयास होगा कि प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में जिले से तीन ग्राम पंचायतों को पुरस्कार अवश्य मिल सके।
राजेंद्र प्रकाश, डीपीआरओ, बहराइच