नफा-नुकसान की गणित बैठाने में जुटे सफेद पोश
- छोटी सी घटना होने पर रायबरेली में चमकने लगती है राजनीति
- किसी नेता ने अप्टा गांव की तरफ नहीं किया रुख, सबको दिख रहा अपना वोट
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। अक्सर छोटी घटनाओं पर राजनीति चमकाने वाले सफेदपोश अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग से दूरी बनाए हैं। नफा-नुकसान की गणित बैठाने में जुटे इन नेताओं को न्याय की आवाज उठाने के बजाय अपना वोट दिख रहा है। यही वजह है कि एक साथ पांच लोगों की हत्या कर दी गई। अप्टा गांव नफरत की आग में झुलस गया, लेकिन किसी नेता ने गांव का रुख नहीं किया। इसको लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं।
जिस तरह अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव में वारदात हुई, उसने पूरे रायबरेली ही नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश को हिला दिया। एक साथ पांच लोगों की हत्या की गई। वर्तमान प्रधान रामश्री के बेटे समेत चार आरोपियों को जेल भेज दिया गया। वारदात को हुए तीन दिन हो गए है, लेकिन किसी भी पार्टी का नेता गांव नहीं पहुंचा है। इसके पीछे लोग तर्क भी बताते हैं।
कहते हैं कि ब्राह्मण और यादव आमने-सामने हैं। दोनों ही जाति हर चुनाव में क्षेत्र में अहम् भूमिका निभाते हैं। हर सफेदपोश यही नफा नुकसान लगा रहा है कि एक पक्ष की तरफ गए तो दूसरा नाराज हो जाएगा। दूसरे पक्ष के पास गए तो पहला पक्ष नाराज हो जाएगा। यानि सफेदपोश इस वारदात को अपने वोट बैंक से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल चाहे जो भी हो, किसी नेता के वहां न पहुंचने पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इस मामले में सपा के जिलाध्यक्ष रामबहादुर यादव का कहना है कि अभी तो नहीं गया हूं। जाने की तैयारी है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष वीके शुक्ला ने वारदात की निंदा की और कहा कि माहौल गरम है, इसलिए नहीं गया। प्रतिनिधि मंडल के साथ जाऊंगा। भाजपा के जिलाध्यक्ष दिलीप यादव और बसपा के जिलाध्यक्ष मुनेश्वर पासी ने मामले में कुछ भी कहने से इंकार किया।