लखनऊ। नैमिष और वरुण विहार आवासीय योजनाओं के करीब 4500 भूखंडों के लिए 35 हजार से अधिक आवेदन आने के बावजूद एक व्यक्ति को दो भूखंड खरीदने की छूट देने के लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं। विरोध के बाद एलडीए बैकफुट पर आ गया है। अब प्रस्ताव को दो नवंबर को बैठक नहीं रखा जाएगा।
एलडीए बोर्ड के पूर्व सदस्य और भाजपा के पूर्व पार्षद रामकृष्ण यादव ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब प्राधिकरण सभी आवेदकों को भूखंड उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो एक व्यक्ति को दो भूखंड खरीदने की छूट देने का औचित्य क्या है। भूखंडों के मुकाबले आवेदकों की बड़ी संख्या बताती है कि मांग अधिक है।
ऐसे में एक व्यक्ति को एक भूखंड देने का मौजूदा नियम बरकरार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अतिरिक्त भूखंड खरीदने हैं, वे पुनर्विक्रय के जरिये ऐसा कर सकते हैं। एलडीए को अधिक से अधिक लोगों को आवास उपलब्ध कराने और अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाने पर ध्यान देना चाहिए।
एलडीए बोर्ड के पूर्व सदस्य और भाजपा नेता गोविंद पांडेय ने भी प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एलडीए का गठन लोगों को उचित कीमत पर बेहतर आवासीय सुविधा देने के लिए हुआ था। जमीन की कमी के कारण प्राधिकरण ने फ्लैटों के निर्माण पर जोर दिया लेकिन इसके बावजूद आवास की जरूरत पूरी नहीं हो सकी। मजबूरी में लोग अनियोजित कॉलोनियों में भूखंड खरीद रहे हैं। ऐसे में प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को भूखंड उपलब्ध कराने की होनी चाहिए, न कि एक व्यक्ति को दो भूखंड खरीदने की छूट देने की।
अभी यह प्रस्ताव चर्चा में है। इसे अभी बोर्ड बैठक में नहीं ले जाया जा रहा है। -एसपी सिंह, सचिव एलडीए