बलरामपुर अस्पताल के स्थापना दिवस में मौजूद डॉक्टर।
लखनऊ। यूपी में करीब 40 हजार गुर्दा रोगी डायलिसिस पर हैं। डोनर के इंतजार में करीब 40 फीसदी मरीज प्रत्यारोपण नहीं करा पा रहे हैं। गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा कुछ ही संस्थानों में है। सरकारी संस्थानों में हर साल करीब 350-400 गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहे हैं। तमिलनाडु में कैडवरिक प्रत्यारोपण अधिक हो रहे हैं। ये बातें सोमवार को बलरामपुर अस्पताल के 156वें स्थापना दिवस समारोह में केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विश्वजीत सिंह ने कहीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा रहे।
उन्होंने कहा, हर साल पांच हजार नए गुर्दा मरीज डायलिसिस पर जा रहे हैं। ऐसे में मरीज को जल्द गुर्दा प्रत्यारोपण करा लेना चाहिए। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने कहा, मरीजों को गुणवत्तापरक इलाज डॉक्टर मुहैया कराए। सरकारी अस्पतालों के प्रति मरीजों का भरोसा बढ़ा है। इलाज की गुणवत्ता के साथ शोध को भी बढ़ाएं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रतन पाल सिंह, परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. सुषमा सिंह, महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. पवन कुमार अरुण, बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, निदेशक डॉ. सुशील प्रकाश आदि ने विचार रखे।
टीम को खत्म करने के लिए सहभागिता जरूरी
केजीएमयू रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कहा, टीबी को खत्म करने के लिए सभी की सहभागिता की जरूरी है। खांसी, बुखार व बेवजह वजन गिरने पर सजग हो जाएं। इसके लिए 100 दिनों का अभियान चलाया जाएगा।
नेत्र रोग विभाग की माड्लर ओटी व वार्ड का उद्घाटन टला
बलरामपुर अस्पताल में नवनिर्मित माड्लर आई ओटी व वार्ड का उद्घाटन मंगलवार को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को करना था। इसे स्थगित कर दिया गया है। अफसरों का कहना है उद्घाटन की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी।