राममंदिर के प्लिंथ के निर्माण का 40 फीसदी काम पूरा हो गया है। इस समय मंदिर की प्लिंथ, गर्भगृह और रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य एक साथ चल रहा है। राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में जानकारी दी गई। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अब तक के कार्यों की समीक्षा की।
बैठक से पूर्व राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल का निरीक्षण किया। इसके साथ ही प्लिंथ का निर्माण कार्य भी देखा। उन्होंने पश्चिम दिशा में चल रहे रिटेनिंग वॉल के निर्माण कार्य का भी जायजा लिया। इंजीनियरों ने उन्हें निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद राम जन्मभूमि परिसर स्थित विश्वामित्र आश्रम में एलएंडटी ऑफिस में नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर के पदाधिकारियों व इंजीनियरों के साथ बैठक की। बाद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने निर्माण कार्यों की प्रगति जानी। इंजीनियरों ने मंदिर निर्माण की प्रगति से उन्हें अवगत कराया।
21 फीट ऊंची प्लिंथ में कुल 17000 ग्रेनाइट के पत्थर लगने हैं। अब तक 10,500 पत्थर राम जन्मभूमि परिसर पहुंच चुके हैं। जिनमें से 7100 पत्थरों का प्रयोग किया जा चुका है। वही गर्भगृह की महापीठ का भी निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। अब तक 45 पत्थर बिछाए जा चुके हैं। बताया कि पश्चिम दिशा में बन रही 12 मीटर गहरी रिटेनिंग वॉल बननी है। अब तक छह मीटर रिटेनिंग वॉल बन चुकी है। बैठक के दूसरे दिन भक्तों के लिए सुविधाएं विकसित करने पर मंथन होगा। पहले दिन की बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपालजी सहित ट्रस्ट, एलएनटी व टीसी के इंजीनियर मौजूद रहे।
अचल मूर्ति स्थापना को लेकर भी हुई चर्चा
पहले दिन की बैठक में राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की एक अचल मूर्ति स्थापना को लेकर ट्रस्ट ने जो योजना बनाई है उस पर भी चर्चा हुई है। तय हुआ है कि रामलला की अचल मूर्ति करीब 5 फीट की हो सकती है। यह मूर्ति सफेद संगमरमर की होगी। इसको लेकर ट्रस्ट देशभर के संत धर्म आचार्यों से राय लेने में जुटा हुआ है। इसके साथ ही राम जन्मभूमि परिसर में माता सीता सहित ऋषि वाल्मीकि, तुलसीदास, जटायु, गणेश के भी मंदिरों की स्थापना को लेकर विचार विमर्श हुआ है। गर्भगृह का निर्माण पूरा होने के बाद ही इन मंदिरों की स्थापना की जाएगी।