लखनऊ। कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक होने की आशंक जताई जा रही है। हालांकि, इससे पहले दूसरी लहर ने ही कई बच्चों से उनका सबकुछ छीन लिया है। राज्य बाल आयोग ने प्रदेशभर से जो रिपोर्ट ली है, उसके मुताबिक अब तक 359 बच्चे महामारी में माता-पिता की मौत हो जाने से अनाथ हो चुके हैं। वहीं, 2626 बच्चों के माता-पिता में से किसी एक को छीन लिया है। ऐसे में प्रदेश में अब तक 2985 बच्चे कोरोना से प्रभावित हुए हैं। फिलहाल यह सूची लगातार अपडेट की जा रही है। इन सबके बीच राहत की बात यह भी है कि कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां के लोगों की सतर्कता के आगे कोरोना की एक न चली और बच्चे अनाथ होने से बच गए।
सहारनपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला
जिस जिले में कोरोना ने सबसे ज्यादा बच्चों के अभिभावकों को छीना है, उनमें सहारनपुर सबसे ऊपर है। यहां 370 बच्चों से माता-पिता का साया छिन गया है। दूसरे नंबर पर मुजफ्फरनगर है, जहां 144 बच्चे प्रभावित रहे। अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर नगर में यह संख्या 107 है। वहीं, लखनऊ में 105 बच्चे प्रभावित हुए हैं।
राहत : इन जिलों में कोई नहीं हुआ अनाथ
सुल्तानपुर, सिद्धार्थनगर, संत कबीरनगर, संभल, रायबरेली, पीलीभीत, मिर्जापुर, मथुरा, महोबा, कन्नौज, जालौन, गाजीपुर, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, इटावा, एटा, चंदौली, बस्ती, बिजनौर, बाराबंकी, बलरामपुर, बहराइच, अमेठी, अमरोहा, औरैया।
इनका दुख भी कम नहीं, माता-पिता दोनों जरूरी
किसी भी बच्चे के लिए माता-पिता दोनों जरूरी हैं। किसी एक के जीवित रहने या किसी एक की मौत से उसके दुख को कमतर नहीं आंका जा सकता है। मुजफ्फरनगर में 128 बच्चे अब एकल अभिभावक के सहारे हैं। सहारनपुर में यह आंकड़ा 346 है, जबकि गोरखपुर में 101 और लखनऊ में 91 बच्चों ने माता या पिता में से किसी एक को खोया है।
बाल हित से समझौता नहीं, उन तक पहुंचेगी मदद
राज्य बाल आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता कहते हैं कि बाल हित से समझौता नहीं होगा। जो घोषणाएं सरकार ने उनके लिए की हैं, उसका लाभ मिलेगा यह हम सुनिश्चित कर रहे हैं। सभी डीएम को निर्देशित किया गया है कि बच्चों का आधार कार्ड, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र की कमी से बाल योजना का लाभ कैसे मिलेगा, यह सुनिश्चित करें। बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए काम करें।