राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 89 लाख बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। इनमें से 35 लाख बच्चे किसी किसी बीमारी से पीड़ित थे।
कार्यशाला में यह खुलासा प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रवीर कुमार ने किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जन्म से लेकर 19 साल तक के 1.64 लाख बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
1500 टीमों ने बच्चों की लंबाई, वजन, नजर, सहित अन्य परीक्षण किए। गंभीर बीमारी वाले बच्चों को जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक रेफर किया जा रहा है।
17 फीसदी बच्चों में खून की कमी, 12 फीसदी में दांतों की बीमारियां, नौ फीसदी में संक्रमण, सात फीसदी में त्वचा रोग, चार फीसदी में कान की बीमारियां और चार फीसदी में विकलांगता पाई गई।
आंकड़ों ने बिगाड़ी छवि
स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर पेश करने वाले आंकड़ों ने प्रदेश की छवि बिगाड़ दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव के.डी. राजू जहां ट्रॉमा और गोसाईगंज सीएचसी की सुविधाएं देख खुश हुए तो आंकड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सुधार की जरूरत बताई।
कहा, यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति से देश के आंकड़े खराब हो रहे हैं। देश में शिशु मृत्युदर जहां एक लाख पर 212 से घटकर 178 हो गई है। वहीं यूपी में यह संख्या 300 है।
श्रावस्ती में शिशु मृत्युदर पर उन्होंने नाराजगी जताई। राजू ने कहा, इस कार्यक्रम में सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच होगी। चाहे वे बीमार हों या नहीं।
नि:शुल्क मिलेगा इलाज
बच्चों के विकास में बाधा बन रही कुछ बीमारियों को चिन्हित किया गया है। बर्थ डिफेक्ट, डिफिशिएंसी व डिसएबिलिटी आदि को ध्यान में रखकर जांच होगी। साथ ही स्वच्छता व पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा।
हर बच्चे को पेट के कीड़े और आयरन की गोली दी जाएगी। बच्चा जिस स्कूल में पढ़ेगा वहां उसकी जांच साल में दो बार होगी। उसे जो भी बीमारी होगी, उसका फ्री इलाज होगा।
देर से जारी हुई गाइड लाइन
यह वित्त वर्ष खत्म होने में तीन महीने बचे हैं लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गाइड लाइन जारी करने की सुध राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों को अब आई है।
सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार ने ही छह माह देरी से बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना का विस्तार कर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गाइड लाइन भेजी। इसे प्रदेश में लागू करने में एनएचएम अधिकारियों को तीन माह लग गए।
राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यशाला भी देर से हुई। ऐसे में 2014 के अंत तक 209 लाख बच्चों व किशोरों के स्वास्थ्य परीक्षण का लक्ष्य पूरा करना एक चुनौती होगा।
सूत्रों के अनुसार ब्लॉक में टीमों के गठन में राजनीतिक दबाव है। मसलन, रायबरेली में अभी तक टीमें नहीं बन पाईं। ऐसे में लक्ष्य कैसे प्राप्त होगा, यह एक बड़ा सवाल है।