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सामूहिक दुष्कर्म में दोषी को 33 साल बाद सजा, एकमात्र जिंदा दोषी को पांच वर्ष की कैद, जुर्माना

Wed, 12 May 2021 08:21 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रावस्ती

सार

एक नाबालिग का अपहरण करके उसके साथ तीन लोगों ने दुराचार किया। इस अपराध में दो महिलाएं भी भागीदार थी। 30 जून 1988 को घटित इस घटना का फैसला 33 वर्ष बाद बुधवार को आया।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एक नाबालिग का अपहरण करके उसके साथ तीन लोगों ने दुराचार किया। इस अपराध में दो महिलाएं भी भागीदार थी। 30 जून 1988 को घटित इस घटना का फैसला 33 वर्ष बाद बुधवार को आया। जब जज मामले में अपराध सुना रहे थे, तब यह भी बताया कि पांच आरोपियों में से चार की मौत मुकदमे के दौरान हो गई। बची एकमात्र महिला आरोपी को पांच वर्ष की सजा के साथ पंद्रह हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

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 लगभग 33 बरस बाद न्याय का एक ऐसा ही मामला बुधवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश रेप एलांग विथ पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश परमेश्वर प्रसाद के न्यायालय दिखा। घटना 30 जून 1988 यानी कि करीब 33 वर्ष पूर्व भिनगा कोतवाली के ग्राम लोनियन पुरवा दाखिला लालपुर महरी में घटी थी। यहां एक महिला अपने मायके में आई हुई थी। उसके साथ उसकी बारह वर्षीय पुत्री भी थी। घटना की रात आरोपी फूलमता व उसकी पुत्री रामावती नाबालिग को बहला फुसला कर भगा ले गई। इसके बाद नाबालिग बालिका के साथ मक्कू उर्फ जगदीश, पूसू व लहरी ने बलात्कार किया। 

घटना की शिकायत पीड़िता की मां ने कोतवाली भिनगा में की। मामले में पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। जिसकी सुनवाई तभी से लगातार न्यायालय में चल रही थी। इस मामले में तीनों पुरुष आरोपी दुराचार के साथ अपहरण के आरोपी तो यह मा, बेटी बहला फुसला कर भगाने के आरोपी थे। करीब 33 वर्ष तक चले इस मामले की सुनवाई में 12 मार्च 2021 को न्यायालय ने सभी पांचों आरोपियों पर दोष सिद्ध किया था। लेकिन उससे पहले ही मक्कू उर्फ जगदीश, पूसू, लहरी व फूलमता की मौत हो चुकी थी। 
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इसके बाद न्यायालय ने एकमात्र आरोपी रामावती पर आरोप पुष्ट करते हुए जेल भेज दिया था। बुधवार को न्यायालय ने उसे पांच वर्ष की सजा के साथ पंद्रह हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता क्रिमिनल सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि यह न्यायालय के सबसे पुराने मामलों में से एक था, जिस पर निर्णय न्यायालय ने सुनाया है। न्यायालय ने आरोपी रामावती को धारा 363 में तीन वर्ष व पांच हजार रुपये अर्थदंड, जबकि धारा 366 में पांच वर्ष की सजा व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाया है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

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