प्रदेश में लगे स्मार्ट मीटरों में भार जंपिंग की जांच का दायरा और बढ़ गया है। पावर कार्पोरेशन ने लखनऊ, वाराणसी व मेरठ से उपभोक्ताओं के 32 स्मार्ट मीटरों को जांच के लिए नोएडा स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) भेजा है। ये स्मार्ट मीटर उसी लॉट के हैं, जिसे भार जंपिंग की शिकायत आने के बाद नमूने के तौर पर जांच के लिए सीपीआरआई को भेजा गया था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि सीपीआरआई को पहले भेजे गए चार स्मार्ट मीटर जांच में फेल हो चुके हैं, लेकिन इसकी रिपोर्ट दबा दी गई थी। उपभोक्ता परिषद के खुलासे के बाद जब मामला तूल पकड़ने लगा तो पावर कॉर्पोरेशन ने 32 स्मार्ट मीटरों को जांच के लिए सीपीआरआई को भेज दिया है। जांच की खबर मिलते ही स्मार्ट मीटर निर्माता कंपनियों ने लॉबिंग में जुट गई है। उपभोक्ता परिषद के मुताबिक पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन व अधिकारी मीटर निर्माता कंपनी व ईईएसएल को बचाने में पूरी ताकत लगाए हुए हैं।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि भारत सरकार के मानक के मुताबिक नमूना मीटर के जांच में फेल होने पर उस लॉट से दोबारा 8 मीटर सीपीआरआई को जांच के लिए भेजा जाता है। इनमें से किसी एक स्मार्ट मीटर में कमी मिलने या फेल होने पर पूरी लॉट को वापस ले लिया जाता है और ऑर्डर भी रद्द किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मीटर फेल होने पर यह पहले ही साबित हो चुका है कि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी मीटर निर्माता कंपनियों के साथ खड़े रहते हैं। लिहाजा सरकार पूरे प्रकरण में पावर कॉर्पोरेशन व बिजली अभियंताओं को अलग रखकर अपनी निगरानी में निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। जिससे सच सामने आ सके।