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केंद्र सरकार की लुभावनी योजनाओं के नाम पर जालसाजों ने 32 करोड़ रुपए ठगे

Thu, 13 Jul 2017 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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जालसाजों ने सहकारी संस्था बनाकर उसे केंद्र सरकार का उपक्रम बताते हुए यूपी के साथ हरियाणा, पंजाब, बिहार में 32 ऑफिस खोले। कृषि सहायता एवं कृषि कल्याण से संबंधित लुभावनी योजनाओं का प्रचार करके लोगों को जाल में फंसाया और हरियाणा में दो फैक्ट्री लगाने का दावा करके 32 करोड़ का निवेश कराकर ऑफिस बंद कर दिया।
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निवेशकों के तगादे व घेराबंदी से परेशान सवा सौ से ज्यादा कर्मचारियों ने गोरखपुर में जालसाजों के ठिकाने पर हंगामा किया। वहां सीएम के कैंप ऑफिस में शिकायत की। फिर डीजीपी से गुहार लगाई। इस पर सोमवार को लखनऊ की आलमबाग कोतवाली में केस दर्ज किया गया है।

आलमबाग कोतवाली के एसएसआई जितेंद्र सिंह के मुताबिक, हरियाणा के हिसार निवासी वीरेंद्र सिंह पटवाल, सज्जन कुमार, सोनीपत के रणवीर सिंह, अनिल कुमार, फतेहाबाद के सुनील कुमार, घरौंदा के विनोद कुमार, खरखैदा के संजय कुमार, पानीपत के विजय धीमान, पंजाब के संजय भिवानी, हरविंदर सिंह समेत सवा सौ लोगों ने गैब ग्राम्य विकास क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (मल्टी स्टेट) के चेयरमैन राजेश कुमार पांडेय उर्फ अष्टभुजा पांडेय व वाइस चेयरमैन राजकुमार तिवारी पर हरियाणा में 26, यूपी, बिहार व पंजाब में दो-दो ऑफिस खोलकर 32 करोड़ की ठगी का आरोप लगाते हुए डीजीपी से शिकायत की थी।
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जिस पर केस दर्ज किया गया है। गोरखपुर के बांसगांव बगही निवासी राजेश कुमार व जौनपुर के खुटहन थाने के डिहिया निवासी राजकुमार ने अगस्त 2014 में कानपुर निवासी गिरीश शर्मा को मुख्य महाप्रबंधक, सुनील तिवारी, चंदन शुक्ला व धनंजय को उपमहाप्रबंधक बनाकर संस्था को भारत सरकार का उपक्रम बताकर कर्मचारियों की नियुक्ति की और एजेंट बनाए।

संस्था को कृषि सहायता एवं किसान कल्याण विभाग से पंजीकृत व 11 राज्यों में कार्यक्षेत्र बताते हुए प्रचार कराया। बड़ी संख्या में लोगों को संस्था से जोड़ने के बाद जुलाई 15 में रोहतक में सवा सौ कर्मचारियों व 6 सौ एजेंटों की बैठक की।
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फैक्ट्री के नाम पर कराया निवेश 

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जालसाजों ने हरियाणा में दो फैक्ट्री लगाने का प्रचार करके लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। बताया कि संस्था का 40 प्रतिशत धन जमानत के तौर पर इलाहाबाद बैंक व सहकारी बैंक पुणे में जमा किया जाता है।

घाटे की स्थिति में बैंक व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निवेशकों को पैसा लौटाया जाएगा। इसी वजह से संस्था में आईएएस अफसर रमाशंकर सिंह की तैनाती की गई है। झांसे में आए कर्मचारियों व एजेंटों ने प्रचार करके लोगों से निवेश कराया।

कर्मचारियों व एजेंटों को वेतन में टालमटोल करने के बाद करीब 32 करोड़ का निवेश कराकर ऑफिस बंद करके जालसाज अंडरग्राउंड हो गए। झांसे में आए निवेशकों ने रकम डूबती देख एजेंटों व कर्मचारियों को घेरना शुरू किया।

इस पर 120 कर्मचारियों व 6 सौ एजेंटों ने गैब संघर्ष सेवा समिति हरियाणा का गठन करके राजेश व राजकुमार की तलाश शुरू की। बड़ी संख्या में कर्मचारी गोरखपुर में उसके घर पहुंचे। वहां ताला लटका मिला। इस पर डीएम-एसपी से शिकायत के साथ गोरखपुर में मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में भी शिकायत की।
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