जालसाजों ने सहकारी संस्था बनाकर उसे केंद्र सरकार का उपक्रम बताते हुए यूपी के साथ हरियाणा, पंजाब, बिहार में 32 ऑफिस खोले। कृषि सहायता एवं कृषि कल्याण से संबंधित लुभावनी योजनाओं का प्रचार करके लोगों को जाल में फंसाया और हरियाणा में दो फैक्ट्री लगाने का दावा करके 32 करोड़ का निवेश कराकर ऑफिस बंद कर दिया।
निवेशकों के तगादे व घेराबंदी से परेशान सवा सौ से ज्यादा कर्मचारियों ने गोरखपुर में जालसाजों के ठिकाने पर हंगामा किया। वहां सीएम के कैंप ऑफिस में शिकायत की। फिर डीजीपी से गुहार लगाई। इस पर सोमवार को लखनऊ की आलमबाग कोतवाली में केस दर्ज किया गया है।
आलमबाग कोतवाली के एसएसआई जितेंद्र सिंह के मुताबिक, हरियाणा के हिसार निवासी वीरेंद्र सिंह पटवाल, सज्जन कुमार, सोनीपत के रणवीर सिंह, अनिल कुमार, फतेहाबाद के सुनील कुमार, घरौंदा के विनोद कुमार, खरखैदा के संजय कुमार, पानीपत के विजय धीमान, पंजाब के संजय भिवानी, हरविंदर सिंह समेत सवा सौ लोगों ने गैब ग्राम्य विकास क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (मल्टी स्टेट) के चेयरमैन राजेश कुमार पांडेय उर्फ अष्टभुजा पांडेय व वाइस चेयरमैन राजकुमार तिवारी पर हरियाणा में 26, यूपी, बिहार व पंजाब में दो-दो ऑफिस खोलकर 32 करोड़ की ठगी का आरोप लगाते हुए डीजीपी से शिकायत की थी।
जिस पर केस दर्ज किया गया है। गोरखपुर के बांसगांव बगही निवासी राजेश कुमार व जौनपुर के खुटहन थाने के डिहिया निवासी राजकुमार ने अगस्त 2014 में कानपुर निवासी गिरीश शर्मा को मुख्य महाप्रबंधक, सुनील तिवारी, चंदन शुक्ला व धनंजय को उपमहाप्रबंधक बनाकर संस्था को भारत सरकार का उपक्रम बताकर कर्मचारियों की नियुक्ति की और एजेंट बनाए।
संस्था को कृषि सहायता एवं किसान कल्याण विभाग से पंजीकृत व 11 राज्यों में कार्यक्षेत्र बताते हुए प्रचार कराया। बड़ी संख्या में लोगों को संस्था से जोड़ने के बाद जुलाई 15 में रोहतक में सवा सौ कर्मचारियों व 6 सौ एजेंटों की बैठक की।