इलाज में लागोंडा। जिला अस्पताल में गुरुवार को चार माह की नवजात की मौत हो गई। आरोप है कि संविदा पर जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर बीएल रस्तोगी ने बच्ची के इलाज के लिए परिवारीजनों से 300 रुपये घूस मांगी। रुपये न देने पर उसे ओपीडी से भगा दिया गया। जबकि जो इलाज बच्ची का इमरजेंसी में हुआ भी, वह गलत हुआ, जिससे बच्ची की जान चली गई। इसे लेकर बच्ची के परिवारीजनों ने आधे घंटे तक जिला अस्पताल में हंगामा किया। सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
परसपुर के रामबारी गांव के रहने वाले मंगल प्रसाद गुरुवार को चार माह की बच्ची प्रिया को दिखाने जिला अस्पताल आए थे। जहां उन्होंने एक रुपये का पर्चा बनवाया और बच्ची को दिखाने संविदा पर कार्यरत डॉ. बीएल रस्तोगी की ओपीडी पहुंच गए। बतौर मंगल प्रसाद बच्ची को देखकर डॉक्टर ने उसे इमरजेंसी में एडमिट कर लिया और बाहर से कुछ दवाइयां लाने को कहा। दवाई लाकर उसने डॉक्टर को दिखाई, जिसके बाद डॉक्टर ने उनसे 300 रुपये अपनी फीस मांगी। जिसे न देने पर डॉक्टर ने उनके साथ अभद्रता कर ओपीडी से भगा दिया। उधर, डॉक्टर की लिखी दवाइयां जैसे ही बच्ची को इमरजेंसी में चढ़ाई जाने लगीं। बच्ची ने रोना तो बंद कर दिया, लेकिन उसका शरीर धीरे-धीरे काला पड़ने लगा। जबकि बच्ची हाथ-पैर भी जोर से झिटकने लगी।
परिवारीजनों का आरोप है कि बच्ची की हालत देखकर वह लोग फिर से डॉ. बीएल रस्तोगी के पास पहुंचे और बच्ची को देख लेने के लिए कहा। लेकिन डॉक्टर नहीं आए। इसी बीच बच्ची की मौत हो गई। जिसे लेकर करीब आधे घंटे तक परिवारीजनों ने डॉक्टर बीएल रस्तोगी की ओपीडी व इमरजेंसी में हंगामा किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद बच्ची के परिवारीजनों ने शिकायत सीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव से की। उन्होंने फोन पर सीएमएस डॉ. अरुणलाल से बात करके मामले की जांच कराने को कहा। उधर, प्रभारी सीएमएस डॉ. बीसी गुप्ता का कहना है कि सीएमएस किसी जरूरी काम से छुट्टी पर गए हैं। उनके आने पर ही मामले की जांच कराई जाएगी।
बच्ची की हालत पहले से ही काफी सीरियस थी। उसके दिल में छेद था। जिसका हरसंभव उपचार भी किया। लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। रही बात 300 रुपये फीस मांगने की तो यह आरोप सरासर गलत है।
-डॉ. बीएल रस्तोगी