परसपुर (गोंडा)। पवित्र अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा आपसी खींचतान के कारण दो भागों में बंट गई है। पहले जत्थे की अगुवाई विहिप व हनुमानमंडल के सुरेंद्र सिंह कर रहे हैं। परिक्रमा का पहला जत्था बाराबंकी से होते हुए घाघरा पार कर दुलारे बाग पहुंचा। यात्रा में शामिल संत-महात्माओं सहित अन्य श्रद्धालुओं का स्थानीय लोगों तथा विहिप व बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने दुलारे बाग में स्वागत किया। दूसरा जत्था 14 अप्रैल को महंत गयादास की अगुवाई में आएगा।
चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा गुरुवार को हनुमान मंडल के परिक्रमा प्रमुख सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में नाव से मूर्तिहन घाट पर घाघरा नदी को पार कर जय श्रीराम का उद्घोष करते हुए साधु-संतो का जत्था जनपद गोंडा की सीमा में प्रवेश कर बहुवन मदार मांझा के दुलारे बाग में पहुंच गया। मूर्तिहन घाट पर सुबह से ही घाघरा नदी पार करते परिक्रमा में शामिल साधु-संतों का ग्रामीणों ने स्वागत कर भोजन का प्रबंध किया। परिक्रमा यात्रा में शामिल साधु-संतों ने दुलारे बाग में पड़ाव कर पूजा पाठ व भजन किया। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परिक्रमा करने से 84 लाख योनियों के भव बंधन से जीव को मुक्ति मिलती है।
बोले संत-महात्मा
परसपुर। चौरासी कोसी परिक्रमा में शामिल उरई जालौन के रूप नरायनदास ने कहा कि चौरासी कोसी परिक्रमा से लोगों में देश की साझा सांस्कृतिक विरासत व भगवान के प्रति आस्था बढ़ती है। अयोध्या के नागा राघव दास ने कहा कि आध्यात्मिक सुख का अनुभव प्राप्त होता है। बिहार सीतामढ़ी से राम सेवक दास का कहना है कि उनकी यह पहली परिक्रमा है। विभिन्न पौराणिक स्थलों के दर्शन को भाग्यशाली बताया। गाजीपुर के मैनेजर दास ने कहा कि अवध धाम तीन परिक्रमाओं में पंचकोसी, चौदह कोसी व चौरासी कोसी परिक्रमा का विशेष महत्व
परिक्रमा पड़ाव स्थल पर रहीं अव्यवस्थाएं
परसपुर। अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा यात्रा के जत्था प्रमुख सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परिक्रमा यात्रा बस्ती के मखभूमि मखौड़ा में एक अप्रैल से 140 किमी चलकर गुरुवार को गोंडा में प्रवेश कर दुलारे बाग में पड़ाव डाला। उन्होंने बताया कि यहां पड़ाव स्थल पर साफ-सफाई, पानी, बिजली की कोई व्यवस्था न होने से परिक्रमार्थियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा।