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महागौरी व सिद्धिदात्री को पूजकर मांगी सुख-समृद्धि

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सीतापुर। वासंतिक नवरात्र के आठवें दिन रविवार को अष्टमी व नवमी के संयोग पर मां दुर्गा के महागौरी और सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना हुई। भक्तों ने विधि-विधान से महागौरी व सिद्धिदात्री की उपासना कर सुख-समृद्धि का वरदान मांगा। सुबह से देर शाम तक प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन को श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। श्रद्धालुओं ने व्रत का पारण किया।
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नवरात्र के अंतिम दिन रामनवमी को हर तरफ श्रद्धा व भक्ति का संगम दिखा। शहर के आलमनगर और पंजाबी धर्मशाला स्थित प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर पर मेला लगा। डेरी के करीब मां काली मंदिर तथा आंख अस्पताल मार्ग के संतोषी माता मंदिर में भी उत्सव सरीखा माहौल रहा। रविवार भोर से ही देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं ने माता रानी के महागौरी और सिद्धिदात्री स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। नवरात्र का अंतिम दिन होने से भक्तों ने घरों में बोए गए जवारों के साथ व्रत का पारण भी किया।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार माता महागौरी सौभाग्य, धन-संपदा की अधिष्ठात्री देवी हैं। भगवान शिव ने काली जी पर गंगाजल छिड़का तो वह महागौरी हो गईं। सृष्टि का आधार एवं अक्षत सुहाग की प्रतीक महागौरी विवाहिताओं को अखंड सौभाग्य प्रदान करती हैं। वहीं, सिद्धिदात्री माता सिद्धियां देने वाली हैं। भगवान शंकर ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से सिद्धियां प्राप्त की थी। इनकी चार भुजाएं हैं। कमल पर आसीन सिद्धिदात्री देवी की केवल मानव ही नहीं बल्कि सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, देवता और असुर भी आराधना करते हैं।
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