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Lucknow: डेढ़ लाख आवारा कुत्तों के लिए बनाने होंगे 30 आश्रय स्थल, रखरखाव पर भारी खर्च होगा

Mon, 10 Nov 2025 11:07 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल हुआ तो कुत्तों के लिए डेढ़ लाख आश्रयस्थलों का निर्माण करना होगा। जिसमें उनके रखरखाव पर भारी खर्च होगा।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब डेढ़ लाख आवारा कुत्ते हैं। ऐसे कुत्तों को पकड़कर रखने के लिए नगर निगम को करीब 30 आश्रय स्थल बनाने की जरूरत पड़ेगी। एक कुत्ते के खाने पर रोजाना 50 रुपये भी खर्च करने होंगे। इस हिसाब से नगर निगम को कुत्तों का पेट भरने के लिए प्रतिदिन करीब 75 लाख रुपये की जरूरत होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले यह आदेश दिया है कि शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, सार्वजनिक खेल परिसर, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थलों से लावारिस कुत्तों को हटाया जाए। ऐसे कुत्तों को आश्रय स्थल में रखा जाए और उनकी नसंबदी भी की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन इलाकों से कुत्ते हटाए जाए, वहां पर उनको नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

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यदि वहीं पर छोड़ा जाएगा तो समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि कुत्तों के काटने के मामले बढ़ रहे हैं। रैबीज से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। ऐसे में लावारिस कुत्तों को पकड़कर उनको आश्रय स्थल में ही रखा जाए। जानकारों का कहना है कि एक आश्रय स्थल पर अधिकतम 5000 कुत्ते ही रखे जा सकते हैं। ऐसे में शहर में मौजूद 1.5 लाख कुत्तों के लिए 30 आश्रय स्थल बनाने पड़ेंगे।

गायों से ज्यादा कुत्तों के खाने का आएगा खर्च
शहर में छुट्टा गायों को पकड़कर नगर निगम कान्हा उपवन में रखता हैं, जहां इस समय करीब 10 हजार गायें हैं। एक गाय के खाने पर एक दिन में करीब 80 रुपये खर्च होता है। हर दिन करीब आठ लाख रुपये का खर्च आता है। चूंकि शहर में छुट्टा गायों से ज्यादा कुत्तों की आबादी है, इसलिए नगर निगम को गायों से ज्यादा कुत्तों के भोजन पर खर्च करना पड़ेगा।

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इसलिए कम हो रहे हमले

- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत अभी सिर्फ कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए उनकी नसबंदी की जाती है। उनको पकड़कर रखा नहीं जाता है।
- कुत्तों को नसबंदी के बाद उसी स्थान पर छोड़ना भी पड़ता है जहां से उसे पकड़कर लाया जाता है।
- जितने कुत्तों की नसबंदी होती है, उससे अधिक पैदा होते रहते हैं।
- शहर में अभी एक ही नसबंदी सेंटर है। दूसरा सेंटर बन रहा है, मगर अभी चालू नहीं हुआ है।

पशु कल्याण अधिकारी नगर निगम डॉ. अभिनव वर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अभी प्रति नहीं मिली है। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, उस पर अमल किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार शेल्टर होम बनाने के लिए जगह चिह्नित की जाएगी। कुत्तों के भोजन-पानी के इंतजाम के साथ कर्मचारी भी तैनात किए जाएंगे।
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