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राजधानी को मिले 26 कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट, आईसीएआई ने जारी किया सीएमए फाइनल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम

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राजधानी को मिले 26 कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट, आईसीएआई ने जारी किया सीएमए फाइनल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम
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दी इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट (सीएमए) के इंटरमीडिएट और फाइनल परीक्षा (दिसंबर 2020) का परिणाम जारी कर दिया गया। लखनऊ शाखा से 26 छात्र संपूर्ण सफलता प्राप्त कर सीएमए बन गए हैं। फाइलन परीक्षा में जहां 31.28 प्रतिशत छात्रों ने सफलता अर्जित की, वहीं इंटरमीडिएट प्रोग्राम में यह प्रतिशत 57 तक रहा है।
लखनऊ चैप्टर अध्यक्ष सीएमए हनी सिंह और सचिव विनय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि फाइनल परीक्षा में कुल 190 छात्र शामिल हुए, जिनमें से 61 सफल हुए और 26 सभी ग्रुप उत्तीर्ण कर सीएमए बन गए हैं। जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल 393 छात्र शामिल हुए, इनमें से 168 ने सफलता हासिल की है। अध्यक्ष हनी सिंह ने बताया कि फाइनल के सभी ग्रुप उत्तीर्ण करने वाले 26 छात्रों में से 11 ने दोनों ग्रुप एक साथ उत्तीर्ण किए हैं। वहीं इंटरमीडिएट में 39 छात्र ऐसे थे, जिन्होंने दोनों ग्रुप उत्तीर्ण किए हैं। जो 26 छात्र सीएमए बन गए हैं, उनमें आदित्य त्रिवेदी, मनप्रीत कौर, राहुल पांडेय, रिया जैन, शालिनी मेहरोत्रा, शीबा अख्तर, शुभम बंसल, शुभम अग्रवाल, प्रशांत यादव, सुनील सिंह, अर्चना निगम, छविशंकर अग्रवाल, हिमांशी लालवानी, शुभांकर गुप्ता, सुमित अठवानी, तरुण सिंह भदौरिया, अनिकेत श्रीवास्तव, हिमानी श्रीवास्तव, नीलेश कुमार द्विवेदी, पल्लवी मुखर्जी, सचिन कुमार श्रीवास्तव, समर्थ श्रीवास्तव, संध्या कनौजिया, शिखर अवस्थी, स्वपनिल शाह, विश्वनाथ प्रजापति शामिल हैं।
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मॉड्यूल पर ही फोकस रहे
मूल रूप से मैं रायबरेली जिले से हूं। स्कूलिंग और एमकॉम की पढ़ाई भी वहीं से की। शुरू से ही इच्छा थी टैक्सेशन क्षेत्र में जाने की। पढ़ाई के दौरान ही मुझे सीएमए कोर्स के बारे में पता चला और फिर तैयारी शुरू कर दी। मैंने फोकस होकर केवल मॉड्यूल से ही पढ़ाई की। दूसरे छात्रों को भी यही सलाह है कि संस्थान से जो भी मॉड्यूल मिलता है, उसपर ही गंभीर रहें। फिलहाल मुझे कंपनी में जॉब करना है, इसी की तैयारी में जुटा हूं।
- आदित्य त्रिवेदी, सीएमए
दबाव में पढ़ाई न करें
लविवि से बीकॉम की पढ़ाई के दौरान लॉ करने का सोचा था, लेकिन तभी शिक्षकों और दोस्तों से इस पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी मिली। मैंने तैयारी के दौरान केवल मॉड्यूल और मॉक टेस्ट पेपर पर ही फोकस किया। दूसरे अभ्यर्थियों को यही सलाह है कि वे कई किताबों के चक्कर में न पड़ें। दबाव में पढ़ाई न करें, मॉड्यल पर ही फोकस कर तैयारी करें, सफलता जरूर मिलेगी। जॉब की तैयारी में जुटी हूं।
- शीबा अख्तर, सीएमए
प्रैक्टिकल का दें ज्यादा महत्व
मैंने प्रैक्टिकल को ज्यादा महत्व दिया। इसलिए तैयारी के दौरान थ्योरी आसान लगी। बीकॉम की पढ़ाई के दौरान 2011 में ही तैयारी शुरू कर दी। फिर ब्रेक लिया और ट्रेनिंग शुरू कर दी। खुद की फर्म भी है और जॉब भी कर रहा हूं। 2016 में फिर से फाइनल की तैयारी शुरू कर दी। दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि वे प्रैक्टिकल को गंभीरता से लें। थ्योरी के कई टॉपिक को यह आसानी से समझा देती है।
- तरुण सिंह भदौरिया, सीएमए
ऑनलाइन मदद भी कारगर
घर में पहले से ही टैक्सेशन का माहौल है। पिता नरेश कुमार श्रीवास्तव पेशे से एडवोकेट हैं और इसी क्षेत्र में प्रैक्टिस करते हैं इसलिए मेरी रुचि भी इसी तरफ बढ़ी। सीएमएस बनने के बाद तो फिलहाल पापा के साथ ही प्रैक्टिस कर रही हूं। कोविड के दौरान ऑनलाइन क्लासेस और यू ट्यूब से तैयारी में काफी मदद मिली। दूसरे अभ्यर्थियों को सलाह है कि पहले वे आत्मविश्वास बनाए रखें। ऐसे पाठ्यक्रमों में उतार-चढ़ाव होते ही हैं।
- हिमानी श्रीवास्तव, सीएमए
सीमित कंटेंट से ही पढ़ाई करें
दूसरे अभ्यर्थी जो इसकी तैयारी कर रहे हैं, उनको सलाह है कि वे ज्यादा किताबों के चक्कर में न पड़ें। किताबें बहुत हैं और कंटेंट भी बहुत ज्यादा है, लेकिन फोकस होकर ही पढ़ाई करनी है। मैने भी यही मंत्र अपनाया और केवल मॉड्यूल पर ही फोकस रहा। बीकॉम की पढ़ाई के दौरान ही तैयारी शुरू कर दी थी। पूरी तरह से सीएमए की तैयारी में जुटा रहा और कॉलेज की पढ़ाई इसी से ही पूरी हो गई।
- समर्थ श्रीवास्तव, सीएमए
समय का सदुपयोग जरूरी
बीकॉम की पढ़ाई के दौरान ही मैंने सीएमए की तैयारी शुरू की और साथ में तभी ट्रेनिंग भी शुरू कर दी। इससे मुझे काफी मदद मिली और समय की भी बचत हुई। कोरोना की वजह से जब गत जून में परीक्षा स्थगित हुई तभी मैने ठान लिया कि दोनों ग्रुप की एकसाथ परीक्षा दूंगी और पहले ही प्रयास में सफलता हाथ लगी। मैंने समय का सदुपयोग सिर्फ तैयारी के लिए किया। अब कॉरपोरेट सेक्टर में जाने की तैयारी में जुटी हूं।
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- संध्या कनौजिया, सीएमए
सेल्फ स्टडी ही मददगार
मैं पिछले पांच साल से यूपीपीसीएल में काम कर रही हूं। 2016 में मैंने सीएमए करने की ठानी। अपने प्रोफेशन में खुद को अपग्रेड करने के लिए सीएमए करने की इच्छा हुई। पति आशीष कुमार मेहरोत्रा और परिवार के सदस्यों ने हौसला बढ़ाया। डिलीवरी भी हुई लेकिन तैयारी में बाधा नहीं आने दिया। मुझे परिवारवालों का भरपूर साथ मिला। काम करने के दौरान सेल्फ स्टडी से ही सफलता प्राप्त की।
- शालिनी मेहरोत्रा, सीएमए
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