अयोध्या में भगवान श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए सरयू किनारे मीरापुर दोआबा में प्रस्तावित स्थल को फिजिबिलिटी कमेटी ने अनुपयुक्त माना है। पर्यटन विभाग ने कमेटी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। अब नए स्थान की तलाश की जाएगी।
प्रतिमा स्थापना के लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नियुक्त किया गया है। निगम के एमडी उत्तम कुमार गहलोत की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने गत दिनों मीरापुर दोआबा गांव का मौका मुआयना किया। सूत्रों के अनुसार कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रस्तावित स्थल के एक ओर सरयू नदी व पुल तथा दूसरी ओर रेलवे ट्रैक है।
नदी होने के कारण वहां आसपास की जमीन में नमी बनी रहती है। ट्रेनों और पुल पर चलने वाले वाहनों से वहां लगातार कंपन होगा। इससे मूर्ति के पैडस्टल की नींव को लगातार खतरा बना रहेगा।
प्रतिमा लगाने के लिए मीरापुर दोआबा गांव में 61.38 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई थी। पहले चरण में 24.3807 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत करने का प्रस्ताव था, जिसकी लागत 117 करोड़ रुपये थी। दूसरे चरण में 330 करोड़़ की लागत से 37 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव था।
प्रदेश सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए 447 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी के साथ पहले चरण में 200 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे। पर्यटन विभाग ने नवंबर के दूसरे सप्ताह में यह राशि अयोध्या जिला प्रशासन को हस्तांतरित भी कर दी थी।
अब जमथरा में मूर्ति लगाने का प्रस्ताव
अयोध्या जिला प्रशासन ने अब गांव जमथरा में भगवान राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया है। वहां पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है। इससे भूमि अधिग्रहण पर कोई खर्च नहीं होगा और समय भी बचेगा।
पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार ने कहा कि निर्माण निगम की तकनीकी कमेटी ने मीरापुर दोआबा में प्रस्तावित स्थल को प्रतिमा की स्थापना के लिए उपयुक्त नहीं माना है। नए स्थान के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।