रायबरेली। मरीजों के इलाज में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई थी जिसको दूर करने की कवायद शुरू की गई है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के लाभ से स्कूली बच्चे वंचित हैं क्योंकि करीब 45 डॉक्टरों ने काम छोड़ दिया है। जिले में अब करीब 24 डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के संचालन में तेजी आएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले में संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम डॉक्टरों के अभाव में बेदम हैं। सभी सीएचसी में एनसीडी क्लीनिके संचालित की गई थीं, लेकिन एक-एक करके डॉक्टरों के काम छोड़ देने के कारण क्लीनिकों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवा के लिए चिकित्सक की व्यवस्था न होने के कारण कार्यक्रम का संचालन नहीं हो पा रहा था। शहरी पीएचसी और आरोग्य मंदिर भी डॉक्टरों की कमी के कारण प्रभावित रहे।
पिछले माह भर्ती प्रक्रिया में 13 नए डॉक्टर मिले हैं। इसमें एनसीडी क्लीनिकों के लिए डॉ. अमित कुमार, डॉ. रामचंदर, डॉ. सहदेव प्रसाद, डॉ. जय प्रकाश विद्यार्थी, जेई/एईएस के लिए डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. अभय कुमार, शहरी पीएचसी के लिए डॉ. विश्वदीप शाक्य, डॉ. रमेश प्रसाद, शहरी आरोग्य मंदिर के लिए डॉ. अंकिता सिंह, टेलीमेडिसिन के लिए डॉ. अमित कुमार, मैटेरनल हेल्थ के लिए डॉ. सपना सिंह, डॉ. रागिनी यादव व डॉ. नेहा गौतम का चयन किया गया है।
इसके बाद भी डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। आरबीएसके टीमें भी डॉक्टरों की कमी के कारण स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को चिकित्सीय सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। इसके अलावा अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रम भी प्रभावित हैं।
एनसीडी, शहरी पीएचसी, आरोग्य मंदिर सहित अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए 13 नए डॉक्टर मिले हैं। शेष पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है। एनएचएम के तरह अन्य चिकित्सकों के भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी, जिससे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का प्रभावी ढंग से संचालन हो सके।
डॉ. शरद कुशवाहा, एसीएमएस/नोडल एनएचएम