छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई में गड़बड़ी करने वाले सूबे के 23 शिक्षण संस्थानों को काली सूची में डाल दिया गया है। यही नहीं, समाज कल्याण विभाग ने उनकी मान्यता खत्म कराने के लिए शासन को पत्र भी लिखा है।
विज्ञापन
काली सूची में डाले गए 21 संस्थान सहारनपुर और दो संस्थान इलाहाबाद के हैं। इस संबंध में समाज कल्याण निदेशक विजय बहादुर सिंह ने बृहस्पतिवार शाम आदेश जारी कर दिया। इसके तहत अगले पांच साल इन संस्थानों में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स को वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
वहीं इस घपले के समय सहारनपुर में वर्ष 2011 से 2015 के बीच कार्यरत रहे पांच जिला विद्यालय निरीक्षकों शिवलाल, कांता रामपाल, चंद्रशेखर, श्यामा कुमार व राधाकृष्ण तिवारी और दो जिला समाज कल्याण अधिकारियों करुणेश त्रिपाठी और मुश्ताक अहमद की संलिप्तता भी पाई गई है।
विज्ञापन
समाज कल्याण निदेशक ने इन सभी अधिकारियों को निलंबित करके उनके खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति भी की है। बता दें, मुश्ताक अहमद अभी भी सहारनपुर में तैनात हैं। इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में तैनात बाबू एसवाई कुरैशी के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
घपले की अवधि में समाज कल्याण विभाग में बाबू जगराम सिंह तैनात थे, मगर उनकी कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है। वहीं, इस अवधि में इलाहाबाद में तैनात रहे अधिकारियों की सूची भी निदेशालय ने तलब की है, ताकि उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जा सके।
क्या है मामला
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2011-12 से 2014-15 के बीच सहारनपुर और इलाहाबाद में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने की शिकायत शासन को मिली थी। जांच में पाया गया कि इन वर्षों में सहारनपुर के 21 और इलाहाबाद के दो संस्थानों ने फर्जी छात्र दिखाकर करीब 15 करोड़ रुपये हड़प लिए।
बिना मान्यता के कोर्सों में भी विद्यार्थी दिखाकर इस योजना का लाभ लिया। जिस सर्टिफिकेट कोर्स की फीस महज 480 रुपये थी, उसे डिप्लोमा कोर्स दिखाकर प्रति छात्र 36 हजार रुपये सालाना तक शुल्क की भरपाई ली।
इलाहाबाद के दो संस्थानों गौतमबुद्ध महाविद्यालय जलालपुर सैदाबाद और गौतमबुद्ध महाविद्यालय फूलपुर ने तो दूसरे संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को अपने यहां दिखाकर योजना के तहत मिली राशि की बंदरबांट की।
दोषी संस्थानों से होगी वसूली
दोषी ठहराए गए सभी संस्थानों से घपले की रकम वसूली जाएगी। समाज कल्याण निदेशक नेवित्त नियंत्रक को निर्देश दिए हैं कि वे सप्ताह भर के भीतर रिपोर्ट दें कि इनमें से किस संस्थान ने कितनी रकम हड़पी है। इस रिपोर्ट के आधार पर वसूली के लिए जिलाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।