कार जलने के वक्त इलाके में नहीं थी बिजली
पुलिस प्रशासन के झूठ की एक और कलई खुली
देर शाम 7.40 से 9.40 बजे तक पनकी कंट्रोल के आदेश पर बंद थी आपूर्ति
जगतपुर के कैनाल फीडर से इटौरा बुजुर्ग समेत 24 गांवों को की जाती है विद्युत सप्लाई
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पूर्व प्रधान समेत पांच हत्याओं के मामले में पुलिस प्रशासन के झूठ की एक और कलई खुल गई है। घटना के ठीक बाद जब पुलिस बिजली के तार गिरने से एसयूवी में आग लगने की बात कह रही थी उस वक्त अप्टा समेत 24 गांवों में बिजली सप्लाई ही नहीं थी।
जगतपुर विद्युत उपकेंद्र से निकले कैनाल फीडर को जाने वाली बिजली लाइन में सोमवार देर शाम 7.40 से 9.40 तक बिजली कटौती की गई थी। जबकि इसी दौरान अप्टा गांव के पास सफारी कार खंभे से टकराई। इससे पोल टूट गया और तार जमीन पर आ गिरे। पुलिस प्रशासन ने पोल टूटने और तार गिरने से आग लगने की बात कही थी। जबकि इस दौरान बिजली आपूर्ति पनकी कंट्रोल रूम के मैसेज संख्या 1343 के आदेश पर बंद चल रही थी। आखिर लाइन में बिजली नहीं थी, तो कार में आग कैसे लग गई।
पावर कॉर्पोरेशन का यह नया खुलासा पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने के लिए काफी है। विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता विवेक खन्ना का कहना है कि सोमवार रात 7.40 से 9.40 बजे तक पनकी स्थित बिजली कंट्रोल रूम के आदेश पर आपूर्ति बंद थी। आश्चर्य की बात यह है कि इसी दौरान घटना का होना बताया गया है। ऊंचाहार थाना क्षेत्र के अप्टा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव में सोमवार रात कार सवार लोगों को पीटने के बाद पेट्रोल डालकर जला दिया गया था। उस समय पुलिस प्रशासन के अधिकारी यही कह रहे थे कि पोल टूटने और बिजली के तार कार पर गिरने से आग लग गई, जिससे पांच लोग जिंदा जल गए। जेई शिवेंद्र मोहन का कहना है कि जगतपुर बिजली उपकेंद्र से निकले कैनाल फीडर से इटौरा बुजुर्ग और उसके पुरवों समेत करीब 24 गांवों को आपूर्ति की जाती है। जिस क्षेत्र में घटना घटी हैं, वहां पर भी इसी फीडर से आपूर्ति की जाती है।