बहराइच। शहर में खुले नाले मौत को दावत दे रहे हैं। नालों में वाहनों के गिरने की घटनाएं आम हैं। 22 लोग गिरकर घायल हो चुके हैं। 13 मवेशियों की जान भी जा चुकी है। इसे लेकर कई शिकायतें हुईं पर जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है कि नाले ढकवाने के लिए उनके पास बजट नहीं है। ऐसे में नींद से जागने के लिए अधिकारियों को शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
जल निकासी के लिए सिविल लाइंस, कानूनगोपुरा, सत्तीकुंआ, जेलरोड, धनकुट्टीपुरा, चांदपुरा, सलारगंज, अकबरपुरा, नाजिरपुरा, घसियारीपुरा नई बस्ती समेत विभिन्न मोहल्लों में 13 बड़े नाले व 18 छोटे नाले हैं।
इन नालों की लंबाई लगभग 50 किलोमीटर के आसपास है। लेकिन 80 फीसदी नाले खुले हुए हैं। उन्हें ढकने का इंतजाम नहीं है। इसके कारण शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र के नालों में आए दिन वाहन और मवेशी गिरकर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
लगभग 13 मवेशियों की नाले में गिरने से जान जा चुकी है। कार और ट्रक नाले में गिरने से बीते तीन वर्षों में 22 लोग जख्मी हुए हैं। इस मामले में कई बार क्षेत्र के लोगों ने आवाज भी उठाई। लेकिन नालों को ढकने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने कोई पहल नहीं की है।
केस- 1
सिविल लाइंस क्षेत्र
सिविल लाइंस क्षेत्र में पानी टंकी चौराहा से डिगिहा तक लगभग तीन किलोमीटर लंबा नाला है। गहराई लगभग साढ़े चार मीटर है। इस नाले में इंदिरा गांधी स्टेडियम के निकट वाहनों के गिरने की नौ घटनाएं हो चुकी हैं। जबकि जिला अस्पताल के सामने आए दिन मवेशी गिरते रहते हैं।
केस- 2
कानूनगोपुरा का नाला
कानूनगोपुरा मोहल्ले में भी बड़ा नाला स्थित है। लेकिन नाले को ढकने की कोई व्यवस्था नहीं है। जनवरी से अब तक तीन बार बाइक सवार नाले में गिरकर घायल हुए हैं। यहां भी मवेशियों के गिरने की घटनाएं आम हैं।
केस- 3
सत्तीकुंआ नाले में गिर चुके बच्चे
सत्तीकुंआ मोहल्ले में भी नाले खुले हैं। यहां पर दो बार खेलते हुए बच्चे नाले में गिर चुके हैं। मुश्किल से उनकी जान बचाई गई है। इसी वर्ष जनवरी व फरवरी माह में चार बार मवेशियों के गिरने की घटनाएं हुई हैं।
जल निकासी के लिए नाले जरूरी हैं, लेकिन इन्हें ढकने के लिए कोई अतिरिक्त बजट नगर पालिका के पास नहीं है। इस मामले में साल भर पूर्व शासन को पत्र लिखा गया था। लेकिन अब तक बजट मिल नहीं सका है। बजट मुहैया होते ही नालों को ढकवाने की कवायद शुरू की जाएगी।
- पवन कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका