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ओसीमरटिनीब मालीक्यूल से बनने वाली दवाएं होंगी प्रतिबंधित

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सीतापुर। ओसीमरटिनीब मालीक्यूल से बनी दवाएं बिक्री के लिए प्रतिबंधित होगी। इसके मिश्रण को मिलाकर अगर कोई अन्य दवा बनाई जाती है तो वह भी प्रतिबंध के दायरे में आएंगी। इन दवाओं की ऑनलाइन व मेडिकल स्टोरों पर बिक्री के लिए पूर्णतया: प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसको लेकर शासन ने दिशा-निर्देश जारी किए है। जिसके जरिए मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी करके कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।
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जिला औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने सोमवार को बताया ओसीमरटिनीब मालीक्यूल से फेफड़े के कैंसर की दवा बनाई जाती है, लेकिन इस मालीक्यूल को अभी तक सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड ड्रग कंट्रोल आर्गेनाइजेशन ने मान्यता नहीं दी है। भारत में मनुष्य पर प्रयोग करने के लिए प्रयोगशाला जांच में इसकी पड़ताल चल रही है। जब तक निष्कर्ष नहीं आता है, तब तक यह प्रतिबंधित रहेंगी। इसको लेकर शासन ने निर्देश जारी किए है। जिसके जरिए कहा गया है कि मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की जाए। यहां पर इस मालीक्यूल से बनने वाली दवाओं का परीक्षण किया जाए। साथ ही अगर कोई कंपनी नए नामों से इस मालीक्यूल का प्रयोग करके या अन्य किसी में मिश्रण करके दवा बना रही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जिला औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने कहा कि शासन ने ओसीमरटिनीब मालीक्यूल से बनने वाली दवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका परीक्षण चल रहा है। साथ ही नवीनीकरण शब्द को हटाकर फीस कम कर दी गई है।


नवीनीकरण की कम हुई फीस
मेडिकल स्टोर पर थोक व फुटकर विक्रेताओं को अब रिनीवल में काफी राहत मिलेगी। डीआई ने बताया कि शासन ने नवीनीकरण शब्द को हटा दिया है। अब इसको लाइसेंस रिटेनरशिप शब्द दिया गया है। पहले जहां दुकान के लाइसेंस के नवीनीकरण की तिथि निकल जाती थी। उसके बाद एक हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से जुर्माना लगता था। अब शासन ने इस जुर्माने को बहुत ही कम कर दिया है। अब यह 60 रुपये प्रति माह के हिसाब से जुर्माना लगेगा। साथ ही ऑफिस से नवीनीकरण का सर्टीफिकेट लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। केवल शुल्क जमा करके ऑनलाइन तरीके से नवीनीकरण हो सकेगा।
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