दो साल से अटक रहे 14वें वित्त व अवस्थापना निधि के काम नगर निगम की ढिलाई से इस साल भी पूरे नहीं हो पाएंगे। बीते माह करीब 50 करोड़ रुपये के कार्यों का शिलान्यास हुआ था, लेकिन ये 31 दिसंबर तक पूूरे नहीं हो पाएंगे। जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उसके हिसाब से करीब 30 करोड़ रुपये के ही कार्य हो पाएंगे। ऐसे में बजट होने के बाद भी करीब 20 करोड़ के काम अटक जाएंगे।वित्तीय वर्ष 2018 के कामों के लिए शासन से करीब 123 करोड़ रुपये का बजट आया था, लेकिन चुनाव आचार संहिता व अन्य कारणों से काम नहीं हो पाए।
साल 2019 में भी सूची न फाइनल होने और फिर समय पूरा हो जाने से ये काम नहीं हो पाए। ऐसे में शासन से समय बढ़ा गया। पहले ये काम इस साल जुलाई तक पूरे करने थे, हालांकि कोरोना के कारण दिसंबर तक समय कर दिया गया। लेकिन लॉकडाउन के चलते आर्थिक संकट के कारण निगम कर्मियों के मई, जून के वेतन पर विकास कार्याें के लिए आया आधा बजट निकल गया। एेसे में विकास कार्यों की सूची को भी बदला गया। नई सूची के बाद 28 अक्तूबर को कार्यों का एक साथ शिलान्यास किया गया। इसके बाद काम शुरू हुए, जिन्हें 31 दिसंबर तक पूरा करना है। अब महज तीन दिन बचे हैं, जबकि 20 करोड़ के काम शुरू भी नहीं हो पाए हैं।
सूची बनने से लेकर टेंडर कराने तक में देरी
14वें वित्त से कराए जा रहे कामों की सूची बनाने में ही देरी हुई। बजट के मुकाबले सूची लंबी थी। ऐसे में सबको खुश करने के लिए सूची बनाने में कई महीने लग गए। सूची बनी तो उसके बाद समय से टेंडर नहीं कराए गए। अनलॉक के चार महीने बाद टेंडर हुए। इसमें भी एक महीने का समय लगा। ऐसे में काम करने के लिए एक माह से भी कम समय बचा। इस कारण अब करीब 100 विकास कार्य बजट होने पर भी नहीं हो पाएंगे।
अभी दो करोड़ रुपये का ही हुआ भुगतान
शासन कामों को तभी पूरा मानेगा, जब इनका भुगतान भी फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिये ऑनलाइन हो जाएगा। अभी तक दो करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ है। करीब 33 करोड़ रुपये के जो काम पूरे होने वाले हैं, उनके बिल भुगतान के स्तर पर नहीं पहुंचे हैं। मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी महामिलिंद लाल का कहना है कि काफी कामों के भुगतान आदेश हो गए हैं। जैसे-जैसे फाइलें आ रही हैं, उनका भुगतान ऑनलाइन सिस्टम पर फीड किया जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त अर्चना द्विवेदी ने कहा कि करीब 15 प्रतिशत काम 31 दिसंबर तक पूरे नहीं हो पाएंगे। इसकी कई वजह हैं। जैसे जोन दो में नाला बनना था, पर अवैध कब्जे नहीं हट पाने से काम शुरू नहीं हो पाया। जोन चार के गोमती नगर और चिनहट क्षेत्र में भी कुछ काम नहीं हो पाएंगे। सभी जोनों में कुछ न कुछ काम ऐसे हैं जो अब तीन दिन में नहीं हो पाएंगे। ऐसे में अब शासन से समय मांगा जाएगा। जिन कामों के टेंडर और वर्क आर्डर हो गए, उन्हें तो पूरा कराने का प्रयास किया ही जाएगा।
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