यूपी में दो विधायकों की सदस्यता राज्यपाल द्वारा खत्म कर दी गई है। इन पर विधायक चुने जाने के बाद भी ठेकेदारी करने के आरोप थे।
उप्र में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह और भाजपा विधायक बजरंग बहादुर के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की गई थी। कि विधायक चुने जाने के बाद भी यह दोनों ठेकेदारी कर रहे हैं। राज्यपाल राम नाईक ने इन विधायकों को बर्खास्त किया है।
ये विधायक उमाशंकर सिंह और बजरंग बहादुर हैं। इन पर पद पर रहते हुए गलत तरीके से टेंडर देने का आरोप था। बसपा के उमाशंकर सिंह बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के और जबकि भाजपा के बजरंग बहादुर महराजगंज की फरेंदा विधानसभा से विधायक थे। यह दोनों विधायक 6 मार्च 2012 को निर्वाचित घोषित हुए थे।
दोनों विधायक बनने के बाद ठेकेदारी कर रहे थे। लोकायुक्त से इस बारे में शिकायत की गई थी। लोकायुक्त के निर्देश पर ही इनके खिलाफ जांच शुरू हुई थी।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने दोनों विधायकों के खिलाफ हुई शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच में पाया था कि दोनों विधायकों ने विधायक रहने के साथ ही ठेकेदारी की। ठेकेदारी के आरोप दोनों विधायकों पर सही पाए जाने पर लोकायुक्त ने राज्यपाल से दोनों की सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश की थी।
लोकायुक्त की सिफारिश पर राज्यपाल ने केंद्रीय चुनाव आयोग से रिपोर्ट मांगी लेकिन चुनाव आयोग ने राज्यपाल द्वारा चार पत्र भेजे जाने के बावजूद उनके पत्रों का कोई जवाब नहीं दिया। इस पर राज्यपाल ने पिछले दिनों पांचवा कड़ा पत्र मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखा। इसके बाद चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को पिछले शनिवार को भेजी।
सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट में लोकायुक्त की रिपोर्ट को सही ठहराया गया है। यह कहा गया है कि दोनों विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का मामला बनता है। जांच के दौरान इन विधायकों से इनका पक्ष भी मांगा गया था। राज्यपाल राम नाईक इन विधायकों के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। गुरुवार की दोपहर को इन विधायकों का बर्खास्त कर दिया गया।