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गहरी हुईं एमएसटी घोटाले की जड़ें, 43.17 लाख का गबन

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फैजाबाद। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की मंथली सीजन टिकट (एमएसटी) घोटाले की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। जिले में दो साल में जारी हुई एमएसटी की जांच में करीब 43 लाख 17 हजार रुपये का घोटाला सामने आया है। इस रीजन के अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी डिपो की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। एमएसटी बनाने का ठेका लेने वाली कंपनी ट्राईमेक्स के खिलाफ रोडवेज प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने की आला अधिकारियों से संस्तुति मांगी है। इस बीच घोटाले की जड़ें प्रदेश के अन्य जिलों में भी होने की आशंका के मद्देनजर प्रबंधन निदेशक पी गुरुप्रसाद ने सभी आरएम व एआरएम से एमएसटी की गड़बड़ियों की जांच कर रिपोर्ट तलब की है। मुख्यालय से एक ऑडिट टीम को यहां सोमवार को भेजा जाएगा।
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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की प्रतिदिन रोडवेज बसों से यात्रा करने के लिए लोग एमएसटी बनवाते हैं। पहले एमएसटी परिवहन निगम अपने काउंटरों से विभागीय कर्मचारियों की देखरेख में बनाता था, लेकिन वर्ष 2012 से परिवहन निगम ने ऑनलाइन एमएसटी बनाने की प्रक्रिया जारी करते हुए प्रदेश भर में ट्राईमेक्स कंपनी को ठेका दे दिया। फैजाबाद डिपो में भी इसका ऑफिस खुला और ऑनलाइन एमएसटी बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। मार्च क्लोजिंग के समय डिपो लेखाकार जितेंद्र कुमार की ओर से कैश का मिलान करने के लिए कई बार ट्राईमेक्स के डिपो प्रभारी शिवांग गुप्ता से ऑनलाइन बनी एमएसटी की डिटेल मांगी गई, मगर वह नहीं दे रहे थे। इसी के बाद शक होने पर लेखाकार ने एआरएम अविनाश चंद्र से शिकायत की। पहले तो एआरएम अविनाश चंद्र ने कई बार आरएम सहित लखनऊ पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराते हुए शिवांग गुप्ता को हटाने की मांग की। बाद में एआरएम ने अपने पासवर्ड का प्रयोग करते हुए जनवरी 2018 से मार्च 2018 तक की डिटेल निकाल कर लेखाकार को दी। जिसकी जांच में सामने आया कि छह लाख 61 हजार 682 रुपये जमा ही नहीं किए गए हैं। इसके बाद मुख्यालय को सूचना दी गई।
बताते हैं कि प्रबंध निदेशक पी गुरुप्रसाद ने मामले को गंभीरता से लेकर क्षेत्रीय प्रबंधक एसके शर्मा से फैजाबाद समेत रीजन के सभी डिपो अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी से जारी एमएसटी की भी जांच कराने का निर्देश दिया। एआरएम अविनाश चंद्र ने बताया कि जांच में रविवार को शाम तक सामने आया कि मार्च 2016 से मार्च 2018 तक कुल 43 लाख 17 हजार रुपये का ट्राईमेक्स के डिपो प्रभारी शिवांग गुप्ता ने गोलमाल किया है। मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर बनाई गई है। उच्चाधिकारियों की संस्तुति मांगी गई है। इस बीच मुख्यालय से ऑडिट टीम भी सोमवार को आकर पकड़े गए गबन की जांच-पड़ताल करेगी।
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जितने पीछे की डिटेल खंगाली, उतना बढ़ा घोटाला
शुरूआत में तीन माह जनवरी 2018 से मार्च 2018 की हुई जांच में छह लाख 61 हजार 682 रुपये जमा ही नहीं किए जाने की बात सामने आई। फिर जांच में जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक जारी ऑनलाइन एमएसटी की डिटेल निकाली गई तो इसमें 27 लाख 17 हजार 684 रुपये का गबन पाया गया। फिर मार्च 2016 से लेकर दिसंबर 2016 तक के बीच में हुई जांच के बाद अब घोटाला बढ़कर 43 लाख 17 हजार से अधिक आया है। जांच का दायरा अभी पीछे के वर्षों तक जा सकता है। गबन के बाद रविवार को एआरएम फाइनेंस एसके श्रीवास्तव व वरिष्ठ लेखाकार सुरेश वर्मा ने स्वत: डिपो पहुंच कर एमएसटी प्रकरण की जांच की है। हालांकि उन्होंने जांच के संबंध में कुछ बताने से इन्कार किया है। अचरज की बात यह है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी ट्राईमेक्स के जनपद लीडर शिवांग गुप्ता को अब तक नहीं हटाया जा सका है।

एआरएम फाइनेंस भी मामले में हैं जिम्मेदार
रोडवेज में एमएसटी गबन की धनराशि जांच के आगे बढ़ने के साथ बढ़ती ही जा रही है। प्रत्येक अधिकारी बात करने से कतरा रहा है, लेकिन अगर अधिकारी पहले से सचेत होते तो इस प्रकार का मामला सामने नहीं आ पाता। रोडवेज इंपलाइज यूनियन के मंडलीय मंत्री बीके अवस्थी का आरोप है कि एआरएम फाइनेंस भी वित्तीय मामलों को लेकर प्रत्येक 15 दिन में जांच करते हैं। लगभग दो साल से अंदरखाने में चल रहे गबन की जानकारी उनको अपनी जांच में नहीं हो सकी । उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।

डीजल शार्ट में हुआ था आठ लाख रुपये का गबन
अभी दो माह पूर्व फैजाबाद डिपो में डीजल के गबन को लेकर मामला सामने आया था। इसमें परिवहन निगम को लगभग आठ लाख रुपये की क्षति हुई थी। पहले तो सिर्फ एक कर्मचारी घनश्याम सरोज के मत्थे पूरा मामला मढ़कर एआरएम ने छुट्टी ले ली थी। पूरे मामले को रोडवेज इंपलाइज यूनियन की ओर से उठाए जाने पर चार अन्य कर्मचारी राम सागर वर्मा, राम लक्ष्मण, बीएन जायसवाल व जयप्रकाश दूबे को चार्जशीटेड किया गया। अभी पूरा मामला जांच के अधीन है। डीजल शार्ट में आठ लाख रुपये की हानि की अभी तक रिकवरी नहीं हुई है।

एमएसटी गबन मामले में तीन वर्ष 2016 से लेकर अब तक की जांच की चुकी है। प्राथमिक जांच में बड़े गबन की बात सामने आई है। पूरा घोटाला ट्राइमेक्स कंपनी के टीम लीडर शिवांग गुप्ता की ओर से अंजाम दिया गया है। कई बार कहने के बाद भी शिवांग ने केश की डिटेल नहीं दी थी, जिसके लिए आरएम व मुख्यालय को पत्र भेजा गया था। फिलहाल शिवांग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है।
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-अविनाश चंद्र, एआरएम, फैजाबाद डिपो
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