तेंदुआ माइनर कटने से 250 बीघा फसल जलमग्न
सीतापुर। लहरपुर क्षेत्र से होकर निकली तेंदुआ माइनर की पटरी उदयभान पुर के पास कटने से आसपास के करीब 150 बीघा खेत में पानी भरने से फसलें जलमग्न हो गईं।
जबकि चार दिन पहले कंजा गांव के पास माइनर कटने से लगभग 100 बीघा फसलें डूब गई थीं। बार-बार माइनर कटने से फसलों के होने वाले नुकसान से किसानों में आक्रोश है।
जबकि नहर विभाग माइनर कटने का ठीकरा किसानों के सिर पर ही फोड़ रहा है।
गुरुवार को उदयभान पुर गांव में पुल के पास तेंदुआ माइनर पानी के दबाव से कट गई। इससे यहां के पुत्तन, राजकुमार, सुशील, रामफल, बाबूराम, रामसागर, कालिका आदि किसानों की लगभग 150 बीघा गेहूं की फसल पानी में डूब गई।
क्षेत्रीय किसानों के मुताबिक गत 18 मार्च को कंजा गांव के पास भी तेंदुआ माइनर कट गई थी।
जिससे क्षेत्र के किसान पप्पू, अमीन, लल्लन, सुंदर, गफूर, यूनुस व लतीफ की 100 बीघा गेहूं व गन्ने की फसल में पानी भर गया था। बार-बार माइनर कटने से किसानों में रोष व्याप्त है।
जबकि नहर विभाग के अवर अभियंता नारायण सिंह माइनर कटने का जिम्मेदार किसानों को ठहरा रहे हैं।
अवर अभियंता ने बताया कि, पानी की जरूरत के लिए किसान ही नहर को काटते हैं और जब पानी के दबाव से नहर ज्यादा कट जाती है तो नहर कटने का आरोप लगाते हैं।
उन्होंने बताया कि, पानी का दबाव कम कर नहर को बांधने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, किसानों का आरोप है कि नहर की सफाई नहीं होने के कारण पानी के दबाव से जगह-जगह इसकी पटरी कट जाती है।
नहर विभाग अपनी कमी छिपाने के लिए किसानों पर दोषारोपण कर रहा है।