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बाघ के खौफ से बचाने के लिए निकलीं जयमाला व चंपाकली

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बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट जंगल से सटे जिन गांवों में लगातार बाघ और तेंदुओं के हमले हो रहे हैं, वहां पर हथिनी जयमाला और चंपाकली को लगाया गया है। इन गांवों में टाइगर प्रोटेक्शन टीम ने गश्त तेज कर दी है। गांव के लोगों को भी अलर्ट किया गया है।
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अब तक चार मासूमों समेत पांच को बाघ और तेंदुआ निवाला बना चुके है, लेकिन इन्हें वन विभाग अब तक पकड़ नहीं सका है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर, ककरहा, मुर्तिहा, धर्मापुर, सुजौली रेंज में 22 से अधिक गांव जंगल से सटे हैं। इन रेंजों के गांवों में बीते तीन माह से एक बाघ और तेंदुए का आतंक है।

अब तक चार मासूमों समेत पांच लोगों को यह वन्यजीव निवाला बना चुके हैं। हमले में आठ लोग घायल हो चुके है। कई मवेशियों की भी जिंदगी खत्म हुई। हमला करने वाले बाघ और तेंदुओं को पकड़ने के लिए मुर्तिहा और धर्मापुर रेंज में वन विभाग की ओर से सात पिंजरे लगाए गए।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से थर्मों सेंसर कैमरे भी गांव व आसपास के इलाकों में लगे हैं। लेकिन हमला करने वाला बाघ और तेंदुआ पिंजरे तक नहीं पहुंच रहे है। मूवमेंट भी निरंतर बदल रहा है। ऐसे में वन विभाग पशोपेश में है।

सुजौली गांव में तेंदुए का किशोर को निवाला बनाने के बाद वन विभाग ने हथिनी जयमाला और चंपाकली के सहारे गश्त की कार्ययोजना तैयार की है। मंगलवार से दोनों हथिनियों के साथ गश्त शुरू कर दी गई है।

कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि कारीकोट और सुजौली इलाके में हाथियों द्वारा गश्त की जा रही है। टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के 10 जवानों को सघन गश्त के निर्देश दिए गए हैं। पीएसी के जवानों का भी सहारा लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में हमले हुए हैं। उन क्षेत्रों में ग्रामीणों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
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