राजधानी में गत वर्ष 2833 सड़क हादसे हुए। इसमें 80 फीसदी दुर्घटनाएं तेज रफ्तार और गलत दिशा में गाड़ी चलाने की वजह से हुए हैं।
हादसों में 1900 लोगों ने जान गंवाई और डेढ़ हजार से अधिक लोग घायल हुए थे। यह खुलासा सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हुआ। जो गत दिनों हुई थी।
इसे लेकर लखनऊ मंडल में हुए सड़क हादसों की समीक्षा भी हुई। मंडलायुक्त ने हादसे की वजह ढूंढने को लेकर अध्ययन रिपोर्ट मांगी थी। जो अभी तैयार नहीं हो पाई है।
पर, अब तक की तैयार रिपोर्ट में विभिन्न थानों में दर्ज सड़क हादसे की तीन प्रमुख वजह सामने आई हैं। सड़क सुरक्षा समिति की अगली बैठक में पूरी रिपोर्ट पेश की जाएगी।
इसके बाद सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। बता दें कि एक जनवरी से 30 नवंबर तक 2833 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1910 लोगों की मौत तथा डेढ़ हजार से अधिक घायल हुए हैं।
बरती जा रही सावधानी
आरटीओ (प्रवर्तन) विदिशा सिंह ने बताया कि मंडल में 220 ब्लैक स्पॉट्स हैं, जहां अक्सर हादसे हो रहे हैं। इन पर रम्बल स्ट्रिप, कैट आई और रोड साइनेज लगवाए जा रहे हैं।
ये हैं वजह
अभी तक रिपोर्ट में जो वजहें निकलकर सामने आई हैं। उनमें तेज रफ्तार में गाड़ी चलाना, गलत दिशा में गाड़ी घुमाना और नशे में वाहन चलाना प्रमुख हैं।
यह हो रही कार्रवाई
सड़क हादसे रोकने के लिए तेज रफ्तार वाहनों का चालान हो रहा है। इसके लिए इंटरसेप्टर गाड़ियों से हाईवे पर धरपकड़ कर 2000 रुपये जुर्माना लगाया जा रहा है। वहीं, गलत दिशा से गाड़ी घुमाकर चलाने वालों के खिलाफ 500 जुर्माना, ब्रेथ एनालाइजर से जांच और पकड़े जाने पर 10 हजार का जुर्माना लिया जा रहा है।